जिस तत्परता के साथ केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मंदसौर भाषण को काउंटर किया है, उससे साबित हो गया है कि हिंदी पट्‌टी के 2018 के चुनाव का एजेंडा अब किसानों के एक बड़े मुद्दे पर आकर टिक गया है. और इसे कांग्रेस हो या भाजपा कोई भी पार्टी खोना नहीं चाहती.


समय वोट की बुवाई का


सवाल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान की दो तिहाई आबादी का है. जो सीधे तौर पर खेती पर निर्भर है. राजनीतिक तौर पर देखें तो यह समय वोटों की बुवाई का है. और दोनों ही प्रमुख दल अपनी अपनी जमीन पर लहलहाती फसल चाहते हैं. निसंदेह भाजपा इन तीनों ही राज्यों और केंद्र में सत्ता में है इसलिए कांग्रेस को टॉस जीत कर पहले मैदान में उतरने का फायदा मिल रहा है.


आईपीएल मैच की तरह भीड़


कहा जा सकता है कि टीम कैप्टन राहुल गांधी ने मंदसौर में न सिर्फ एक सधी हुई बल्लेबाजी की बल्कि दो तीन बार चौके-छक्के मारकर मैदान में बैठी हजारों की भीड़ को भी अपने साथ खेल में शामिल कर लिया. जो भीड़ शहरों में आईपीएल मैच को देखने के लिए सड़कों पर उतरती है वैसी ही भीड़ बुधवार को मंदसौर की सड़कों पर दिखाई दी. जिनमें युवा बड़ी संख्या में दिखाई दिए. चिलचिलाती धूप में सुरक्षा के कड़े घेरे को पारकर गरमी को सहते लोग बता रहे थे कि प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ अंडर करंट फैल चुका है.


टीम कैप्टन राहुल गांधी ने मंदसौर में न सिर्फ एक सधी हुई बल्लेबाजी की बल्कि दो तीन बार चौके-छक्के मारकर मैदान में बैठी हजारों की भीड़ को भी अपने साथ खेल में शामिल कर लिया.

चुनावी दिशा तय कर दी


मौका पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों की बरसी का था. और इस भावनात्मक मौके पर राहुल ने अपनी चुनावी दिशा को तय कर दिया. किसान, रोजगार, युवा उनके भाषण के अह्म मुद्दे रहे. कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद दस दिन में कर्ज मुक्ती की एक बड़ी घोषणा उन्होंने की. वह चीन जो पूरी दुनिया को 80 प्रतिशत लहसुन बेचता है, उस चीन में मंदसौर का लहसुन ले जाने की बात उन्होंने की. क्योंकि मंदसौर देश का सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक क्षेत्र है और आज यहां बंपर फसल के बावजूद किसान 50 पैसे से एक रू. में अपनी फसल के दाम गिन रहे हैं. चीन से आने वाला लहसुन उनकी कमर तोड़ रहा है.


कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद दस दिन में कर्ज मुक्ती की एक बड़ी घोषणा उन्होंने की. वह चीन जो पूरी दुनिया को 80 प्रतिशत लहसुन बेचता है, उस चीन में मंदसौर का लहसुन ले जाने की बात उन्होंने की.

मेनीफेस्टो तय कर दिया


राहुल ने हर जिले में खेतों के नजदीक फूड प्रोसेसिंग प्लांट की घोषणा कर एक तरह से कांग्रेस का मेनीफेस्टो तय कर दिया. खेतों से लेकर शहरों तक फूड चेन बनाने की बात की. नकद पैसा आज किसान की सबसे बड़ी कमजोरी है. जिसे भांपते हुए उन्होंने घोषणा कर दी की उनकी सरकार बनीं तो मंडी में अब चेक नहीं नकद भुगतान होगा. चीन के पसरते बाजार और खत्म होते रोजगार पर सीधा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि अब मेड इन चाइना की जगह मेड इन मंदसौर मोबाइल क्यों नहीं हो सकते.


नसीहतें देकर जताया अब वे हैं अध्यक्ष


उनके भाषण का एक अंश ऐसा था जहां उन्होंने अध्यक्ष अध्य्क्ष के बतौर अपनी ताकतवर भूमिका का भी इजहार कर दिया. उन्होंने खुल कर सख्त लहजे में बताया कि वे अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से क्या चाहते हैं. 15 साल से मध्यप्रदेश में सत्ता से दूर होने के बावजूद मौजूदा सत्ता पक्ष के साथ सुविधाजनक राजनीति करने वाले नेताओं को उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि वे जमीन पर उतरें और काम करें तो ही उनकी भागीदारी कांग्रेस सरकार में होगी.


यही मौका था जब वे सैकड़ों की तादाद में बैठे अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर सकते थे. उन्होंने उनका दिल जीतने की कोशिश करते हुए कहा कि उनके लिए पहली प्राथमिकता अगर देश की जनता है तो उसके बाद उनका जमीनी कार्यकर्ता है


जिस तरह गुजरात चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल को सतही तौर पर अलग-थलग रखकर चुनाव लड़ा गया वैसा ही यहां दिग्विजय सिंह के साथ दिखाई दे रहा है

दिग्विजय को अलग-थलग रखना रणनीतिक प्लान


राहुल के भाषण को उपरी तौर पर सुने तो लगता है कि मध्यप्रदेश में अब कमलनाथ और सिंधिया का दौर शुरू हो चुका है. जिस तरह से उन्होंने इन दोनों नेताओं के नाम एक से ज्यादा बार लिए. और मंच से लेकर भाषण तक दिग्विजय सिंह दूर दिखाई दिए. लेकिन इसे कांग्रेस का एक रणनीतिक प्लान भी माना जा सकता है. जिस तरह गुजरात चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल को सतही तौर पर अलग-थलग रखकर चुनाव लड़ा गया वैसा ही यहां दिग्विजय सिंह के साथ दिखाई दे रहा है.


दरअसल, भाजपा जिस तरह गुजरात में चुनाव को अहमद पटेल के इर्द-गिर्द ले जाना चाहती थी वैसा ही यहां भाजपा का एजेंडा दिग्विजय सिंह के कार्यकाल को फिर से टारगेट करने का है. क्योंकि भाजपा को जमीनी तैयारियों में सबसे ज्यादा खतरा दिग्विजयसिंह को लेकर हैं.


राहुल इस तरह का कोई मौका भाजपा को नहीं देना चाहते. इसीलिए सिंह की भूमिका को चुनावी मंच के नेता की जगह नेपथ्य में रहकर तैयारियों को पूरा करने में झोंक दी गई है. निसंदेह सिंधिया और कमलनाथ के प्रति पूरा भरोसा जता कर राहुल ने जता दिया है कि अब चुनावी रथ पर संवार सारथी और अर्जुन कौन है.