उमरिया जिले का आकाशकोट इलाके में पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है. आकाशकोट क्षेत्र के करीब 25 गांव प्यास बुझाने के लिए दो किलोमीटर दूर पहाड़ी घाट पर चढ़ते हैं.


ग्रामीणों की प्यास बुझाने के जिम्मेदार अधिकारी बरसात का इंतजार कर रहे हैं, जबकि ये 25 गांव भीषण जलसंकट से जूझ रहे हैं. हालात से समझौता कर ग्रामीण पीने के पानी के लिए कुआं खोद रहे हैं. गांव में इस कुएं की खुदाई में बच्चे, महिला और बुजुर्ग भी शामिल हैं.


आकाशकोट के बाजाकुंड गांव में पानी के लिए सरकार के इंतजामात नाकाफी साबित हो रहे हैं. इस गांव के लोगों का इन दिनों में सिर्फ और सिर्फ पानी की व्यवस्था करना एकमात्र उद्देश्य बन गया है. गांव के लोग मानते हैं कि पानी की कमी के कारण ग्रामीणों की मौत हो जाएगी. गांव में इतनी भीषण गर्मी के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इसके स्थायी समाधान पर विचार नहीं कर रहे हैं.


गांवों में पानी की व्यवस्था करने के लिए सरकार से मिलने वाली रकम भी इन अधिकारियों की भेंट चढ़ गई. पीएचई विभाग ने इलाके में 29 हैंडपंप लगाए हैं, लेकिन किसी भी हैंडपंप से पानी नहीं आ रहा है. विभान ने इन्हें लगाने के करोड़ों रुपयों का बिला तो बना दिया, लेकिन पानी आया या नहीं, इसकी चिंता नहीं की. आकाशकोट के इन 25 गांवों में पानी की व्यवस्था करने के नाम पर सरकारी दस्तावेजों में करोड़ों रुपयों के काम हो रहे हैं, लेकिन शायद ही कभी इन गांवों में सरकार से जल संकट से निपटने के उपाय पहुंचे.