राजधानी जयपुर देश के प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो चुका है. अब जरूरत इस बात की है कि किस तरह से जयपुर में बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाया जाए. इस दिशा में अगर मेट्रो रेल प्रशासन चाहे तो अपनी अहम भूमिका निभा सकता है. मेट्रो के फेज 2 का विस्तार अगर सही तरह से किया जाता है तो भविष्य में मेट्रो के संचालन के बाद राजधानी के प्रदूषण में खासी कमी आ सकती है.


मेट्रो के लिए हाल ही में फ्रांस की कंपनी ईजीआईएस रेल एसए की ओर से किए गये सर्वे की रिपोर्ट में यह सामने आया है. रिपोर्ट में जयपुर शहर के सबसे व्यस्ततम मार्ग टोंक रोड पर फेज-2 के तहत मेट्रो का रूट बनाने की सिफारिश की गई है. साथ ही प्रस्तावित जयपुर मेट्रो चरण-2 का रूट लगभग 8 किलोमीटर तक बढ़ाने को भी कहा गया है. इस प्रस्ताव के मुताबिक नए रूट की कुल लंबाई 31 किलोमीटर बताई गई है.


मौजूद रूट की लंबाई है 23 किमी


मौजूदा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में मेट्रो रूट की लंबाई 23 किमी (अंबाबाडी से सीतापुरा) है. इस मार्ग पर बढ़ते यातायात को देखते हुए फ्रांस की कंपनी की ओर से किए गए सर्वे में मेट्रो रूट की लंबाई में वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है. यूडीएच के एक वरिष्ठ अधिकारी अनुसार वे जयपुर मेट्रो का एक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए काम कर रहे हैं. इसका निर्माण कार्य अगर चरणों में उठाया जाता है तो भविष्य के लिए फायदेमंद होगा.


नई डीपीआर बनने का काम शुरू


फ्रांस की कंपनी के सर्वे के बाद आए सुझावों को देखते हुए मेट्रो फेज-2 की नई डीपीआर बनाने का शुरू कर दिया गया है. इसमें नए सुझावों को शामिल किया जा रहा है. डीपीआर बनने के बाद सरकार की मुहर लगने पर काम आगे बढ़ सकेगा. जेएमआरसी ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 2011 में मेट्रो फेज-2 टू को लेकर अपनी पहली डीपीआर तैयार की थी. उसके बाद दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने 2014 में संशोधित डीपीआर बनाई और टर्मिनल-2 के पास हवाई अड्डे पर एक भूमिगत मेट्रो स्टेशन का प्रस्ताव दिया था. प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया था कि मेट्रो ट्रेन जवाहर सर्किल तक भूमिगत हो जाएगी। उसके बाद सिंधी कैम्प बस स्टैंड तक ऊंचे ट्रैक बनाए जाएंगे.

अब नए अध्ययन में रूट की लंबाई बढ़ाकर 31 किलोमीटर करने और मार्ग पर स्टेशनों की संख्या भी 20 से 24 किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है. नई डीपीआर में अगर फ्रांस की कंपनी के सुझावों का माना जाता है तो परियोजना की लागत 40 फीसदी बढ़ने की संभावना है. पूर्व में मेट्रो फेज-2 की लागत दस हजार करोड़ रुपए आंकी गई थी.