छत्तीसगढ़ के कोरबा में मुख्यमंत्री ऋण योजना धीरे धीरे दम तोड़ती नजर आ रही है. 8वीं पास बेरोजगारों को उद्योग और व्यापार के लिए राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसके लिए सरकारी पेचीदगी को बड़ा कारण बताया जा रहा है. कोरबा के जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को इस वित्तीय वर्ष में 40 का लक्ष्य मिला है.


इस दौरान वित्तीय वर्ष को शुरू हुए 2 माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक केवल 7 बेरोजगारों ने ही ऋण के लिए आवेदन किया है. जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक आर. सी. एस. ठाकुर ने माना है कि ऋण के लिए बेरोजगारों की रुचि कम है. गति धीमी है. आगामी 15 जून तक का बेरोजगार आवेदन कर सकते हैं.


इस योजना के तहत उद्योग के लिए 25 लाख, व्यवसाय के लिए 2 लाख, सेवा के लिए 10 लाख, परिवार की आमदनी 3 लाख से कम होना अनिवार्य है. पिछले साल कुल 51 आवेदन जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को मिले थे, जिसमें केवल 24 बेरोजगारों को ऋण मिला. इधर, बेरोजगारों की मानें तो मुख्यमंत्री ऋण योजना तो अच्छी है लेकिन दस्तावेज और सरकारी खानापूर्ति के कारण समय लग जाता है. आवेदन जमा जरूर होता है लेकिन बैंक आवेदन रिजेक्ट कर देते हैं. ऐसे में जरूरतमंद बेरोजगारों के रोजगार से जुड़ने के सपने टूट जाते हैं.