नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सरकारी बंगले को खाली करने के बाद भी बंगला विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा विवाद में अखिलेश यादव पर बंगले से सामान ले जाने और तोड़फोड़ करने का आरोप है. हालांकि, समाजवादी पार्टी का कहना है कि सरकारी बंगले में तोड़फोड़ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर की गई है.

समाजवादी पार्टी तोड़फोड़ के आरोपों में घिरे पूर्व सीएम अखिलेश के बचाव में आगे आई है. पार्टी का कहना है कि यूपी की योगी सरकार ने उपचुनाव की हार की खीज मिटाने के लिए तोड़फोड़ करवाया है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील साजन ने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव को बदनाम करने के लिए अफसरों से बंगले में तोड़फोड़ करवाई गई.

समाजवादी पार्टी ने ये भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव द्वारा रात को सरकारी बंगले की चाबी सौंपने के बाद साजिश के तहत यहां तोड़फोड़ करवाई गई. ताकि, सुबह मीडिया को इसे दिखाया जा सके और अखिलेश यादव को बदनाम किया जा सके.

सुनील साजन के कहा, 'आखिर राज्य संपत्ति विभाग के बजाए सीएम के साथ रहने वाले लोग वहां क्यों गए. ये गोरखपुर और कैराना की हार का बदला लेने के लिए हताश होकर उठाया गया कदम है.' उन्होंने कहा कि हम स्वीकार करते हैं कि हमारी जो चीज थी उसे ले गए लेकिन बिजली का स्विच बोर्ड उखाड़ना, तार निकलना और तहस नहस करने का काम हमने नहीं किया, बल्कि ये सब योगी सरकार की ओर से कराया गया है.

वहीं, यूपी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि सरकारी बंगले से एसी और टाइल्स को नहीं निकालना चाहिए था. ये सब सरकारी संपत्ति थी. ऐसा करके अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है. इसकी जांच होनी चाहिए.

परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि सरकार ये काम क्यों करेगी, ये अखिलेश यादव ने अपनी विलासता पूर्ण जीवन को छिपाने के लिए किया. उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में प्रदेश को लूटा गया है उसे छिपाने के लिए बंगले को तहस नहस किया गया है और रही बात OSD के बंगले तक जाने की तो उनका मंत्रालय है वहां जाने का उन्हे पूरा अधिकार है.

स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जिस तरह महंगे सामान सरकारी बंगले में लगाए गए, जब उसे खाली करने की नौबत आई तो सबकुछ छिपाने के लिए लिए ये तोड़फोड़ की गई. उन्होंने कहा कि सरकारी बंगले को निजी बंगले में तब्दील कर दिया गया था विदेशों से विदेशी सामान मंगवाकर लगवाए गए थे. यह सच जनता के सामने न आने पाए और विलासिता पूर्ण जीवन की पोल न खुले इसलिए अखिलेश यादव ने तोड़फोड़ की. सरकार ऐसे कामों में नहीं पड़ती और सरकार पर आरोप लगाना बिल्कुल गलत है.

बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीती रात लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित अपने सरकारी बंगले की चाभी राज्य सरकार को सुपुर्द कर दी. हालांकि, इसके बाद मीडिया के सामने आईं तस्वीरों ने यूपी की सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी हैं.