नई दिल्ली। महज एक माह के भीतर सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर राजनिवास में धरने पर बैठ गए। फर्क सिर्फ इतना रहा कि पिछली बार वह सड़क पर बैठे थे जबकि इस बार उन्होंने उपराज्यपाल निवास के भीतर प्रतीक्षालय में डेरा जमाया है। उनके साथ तीन अन्य मंत्री भी हैं।


उन्होंने उपराज्यपाल से तीन मांगों पर तत्काल सहमति देने की मांग की है, जिन्हें मानने देने से उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल ने इनकार कर दिया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राजनिवास बुलाकर उनकी "हड़ताल" खत्म कराने की "धमकी" दी।


उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री के इस कृत्य को फिर से बिना कारण का धरना बताया है। इस बीच राजनिवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। देर शाम पुलिस की कई टुकड़ियां वहां पहुंच गईं। राजनिवास के बाहर दो जगह बैरिकेडिंग कर दी गई है। बैरिकेडिंग के बाहर सड़क पर एक और मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, विधायक अलका लांबा और सोमनाथ भारती के साथ कुछ कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए।


जानकारी के मुताबिक केजरीवाल शाम साढ़े पांच बजे के करीब एलजी से मिलने राजनिवास पहुंचे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन और श्रम मंत्री गोपाल राय भी थे। एलजी से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें एक ज्ञापन देते हुए तीन मांगें तत्काल मानने का आग्रह किया।


ये हैं मुख्यमंत्री की मांगें


- दिल्ली के आईएएस अधिकारी, जो चार माह से हड़ताल पर हैं, को काम पर लौटने का आदेश दिया जाए।


- जिन अधिकारियों ने चार माह से काम लटका रखा है, उन पर कार्रवाई की जाए।


-राशन की घर पर ही डिलीवरी योजना को मंजूरी दी जाए। लेकिन एलजी ने इसके लिए साफ इनकार कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री अन्य मंत्रियों सहित एलजी के चैंबर से निकल प्रतीक्षालय में आकर बैठ गए।


शाम छह बजे के आसपास मुख्यमंत्री ने टवीट किया- "हमने एलजी को पत्र दे दिया है मगर उन्होंने कार्रवाई से इनकार कर दिया है। वह अपना संवैधानिक कर्तव्य निभा रहे हैं। अब कोई विकल्प नहीं बचा। हमने एलजी को विनम्रता से कह दिया है कि जब तक वे हमारी मांगों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, हम नहीं जाएंगे।"


उन्होंने यह भी कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ होगा कि आईएएस अधिकारी चार माह से हड़ताल पर चल रहे हैं। आखिर क्यों? राशन की घर पर ही डिलीवरी होने से इसमें भ्रष्टाचार खत्म होगा लेकिन इसके लिए भी एलजी ने स्वीकृति नहीं दे रहे।


सिसोदिया ने ट्वीट किया कि उन्होंने भी कई बार एलजी से मिलकर और पत्र लिखकर अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराने को कहा लेकिन एलजी ने आज तक ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। अगर एलजी खुद ही ऐसे अधिकारियों को सहयोग करेंगे तो इस स्थिति में निर्वाचित सरकार कैसे काम कर पाएगी?


पीएमओ को भी लिया निशाने पर


इससे पहले दिन में केजरीवाल ने पत्रकार वार्ता कर प्रधानमंत्री कार्यालय पर आरोप लगाया था कि पीएमओ के इशारे पर ही उपराज्यपाल, आईएएस अधिकारियों और सरकारी एजेंसियों के जरिए आप सरकार को परेशान किया जा रहा है। मालूम हो कि आप सरकार और अधिकारियों के बीच यह रस्साकशी 19-20 फरवरी की रात से चल रही है, जब मुख्यमंत्री निवास पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट की गई थी। तभी से अधिकारी आप मंत्रियों के साथ बैठकों का बहिष्कार कर रहे हैं। इससे पहले 14 मई को भी केजरीवाल ने सीसीटीवी कैमरे के मुददे पर अपने साथी मंत्रियों और विधायकों के साथ राजनिवास के बाहर धरना दिया था लेकिन करीब तीन घंटे के बाद खुद ही उठ गए थे।