मुंबई, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मानहानि मामले में महाराष्ट्र की भिवंडी अदालत में पेश हुए. इस दौरान उनपर इस मामले में आरोप तय किए गए. सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने अपने आप को निर्दोष बताया, उन्होंने कहा कि मैं इस मामले में दोषी नहीं हूं. इस दौरान उनके साथ महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण और अशोक गहलोत भी रहे.


मामला क्या है?


दरअसल संघ कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने 2014 में भिवंडी में राहुल गांधी का भाषण सुनने के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया था. राहुल ने उस भाषण में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे आरएसएस का हाथ था.


अपमान और दंडनीय धारा लागू


सुनवाई के दौरान जज ने बयान पढ़ते हुए कहा किआपने आरएसएस संगठन को बदनाम किया. आपका बयान था कि आरएसएस के लोगों ने गोली मारी और सरदार पटेल ने लिखा है. सुनवाई में कहा कि इस मामले में धारा 499 के तहत ये अपमान है और धारा 500 के तहत ये दंडनीय भी है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मानहानि मामले में भिवंडी कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए सुबह 8 बजे मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे. इसके बाद सीधे वहां से भिवंडी के लिए रवाना हो गए. कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद मंबई वापस आकर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ता से मुलाकात करेंगे.


2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए कांग्रेस करीब 15 हजार बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. ये कार्यक्रम बॉम्बे प्रदर्शनी केंद्र गोरगांव में है. इसके अलावा पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे. राहुल गांधी के मुंबई में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से शाम 4 बजे मुलाकात करने का कार्यक्रम भी है.

बता दें कि आरएसएस मानहानि मामले में लिखित हलफनामा के बजाय बयान दर्ज करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की याचिका पर अदालत ने सुनवाई करन के बाद 12 जून की तारीख तय की थी. इसके साथ ही आज ही दिन बचाव पक्ष (राहुल गांधी) का बयान भी दर्ज किया जाएगा.


हालांकि इस तरह के मामले में समरी ट्रायल यानी लिखित बयान के आधार पर सुनवाई की जाती है, लेकिन राहुल गांधी ने समंस ट्रायल (बयान दर्ज) का अनुरोध करते हुए पिछले महीने एक याचिका दायर की थी.


कांग्रेस अध्यक्ष के वकील नारायण अय्यर ने कहा था कि यह मामला ऐतिहासिक तथ्यों से संबंधित है, इसलिए उन्हें कई दस्तावेजों का सहारा लेना पड़ेगा और विशेषज्ञों के बयान दर्ज करवाने होंगे.


राहुल सुप्रीमकोर्ट भी गए थे


बता दें कि इससे पहले राहुल गांधी ने इस मामले को खारिज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस पर शीर्ष अदालत ने कहा था कि उन्हें इस तरह से किसी संस्था को बदनाम नहीं करना चाहिए था. अगर वे इस मामले में अफसोस जाहिर नहीं करते हैं तो उन्हें कोर्ट में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा. गांधी ने इसे खारिज करते हुए अदालती कार्यवाही में शामिल होने की बात कही थी.