रायपुर। घरों से निकलने वाले कूडे व वेस्ट पानी को मौके पर यदि सही तरह से रिसाइकिल कर दिया जाए तो घर के पार्कों में सब्जी समेत फलदार पौधों को लगाया जा सकता है। इससे किचन, बाथरूम में व्यर्थ हो रहे रोजाना लगभग 3 सौ लीटर पानी का सही तरह से उपयोग हो जाएगा।


कुछ इसी तरह की योजना पर कार्य कर रहे हैं इंदिरा गांधी कृषि विवि के डॉ. केपी वर्मा। वे मौजूदा समय स्वयं के घर में मुनगा, भिंडी, नीबू, कटहल, आम के साथ कई फूलदार पौधे लगा चुके हैं। पौधरोग विभाग में कार्यरत डॉ. वर्मा का कहना है कि महज 20 मिनट की मेहनत से घर में ठंडक के साथ शुद्ध सब्जी, फल पाया जा सकता है।


पानी को लेकर जिस तरह से पूरे देश में हाहाकार मचा है। उससे तो यही लग रहा है कि आने वाले समय में पानी की किल्लत के साथ पर्यावरण भी दूर हो जाएगा, इसलिए हर किसी को पर्यावरण के साथ घर के रोजमर्रा कार्यों में खर्च हो रहे पानी का सही उपयोग किया जाए। घर में रोजाना किचन और बाथरूम से लगभग दो सौ लीटर पानी रोजमर्रा के कार्य से खर्च हो जाता है।


इस पानी को पाइप के माध्यम से घर के गार्डेन में बनाए टैंक में जमा करते हैं। इससे एक दिन छोड़कर सब्जी, फूलदार पौधों व पेडों को सिंचित करने में उपयोग करते है। इसी तरह से किंचन के पानी से भिंडी की खेती तैयार किया गया है।


घर में जैविक खाद हो रही तैयार गार्डन में छोटे-छोटे पिट तैयार कर जैविक कूड़े से खाद घर में बनाते है। इसके लिए घर में उपयोग हो रही रोज की हरी सब्जियों, पेड़ के सूखे पत्ते आदि को जमा करते है। जो 15 से 25 दिन में जैविक खाद तैयार हो जाया करती है।


इसका उपयोग के घर के गार्डेन, सब्जी की खेती में उपयोग किया जा रहा है। इस तरह से घर में रोज के लिए हरी सब्जी के साथ आम, कटहल, फूल बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही है।


हजारों मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा 


प्रतिदिन शहर से करीब कई हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। इसमें करीब 70 फीसद कूड़ा जैविक है। 20 फीसद प्लास्टिक और अन्य धातुओं का कचरा है। करीब दस फीसद गीला कूड़ा प्रतिदिन निकल रहा है। सबसे बड़ी समस्या कूड़े के निस्तारण की आ रही है।


अगर हर रहवासी घर में इस तरह के नियम बना ले तो स्वयं के अलावा वेस्ट वाटर को रिसाइकिल कर पार्कों और बागवानी में लगे पौधों को पानी दिया जा सकता है। इससे पौधों को जीवन मिलेगा और कूड़े की समस्या से छुटकारा मिलेगा।


- जागरूक होने की जरूरत घर में खर्च हो रहे गंदे पानी के प्रति थोड़ा सा सिर्फ जागरूक होने की जरूरत है। इससे एक नहीं, कई तरह के फायदे हैं। - डॉ. केपी वर्मा पौधरोग विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विवि