जयपुर राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है, लेकिन राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी सत्ता बचाए रखने के लिए अपनी चुनावी कसरत शुरू नहीं कर सकी है क्योंकि वहां पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का मामला सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा. और इसकी वजह है केंद्रीय और राज्यस्तरीय नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर खींचतान.


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच हुई बैठक के बावजूद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया. राजस्थान के 10 बड़े नेताओं को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अमित शाह से मुलाकात की थी.


दूसरी ओर, बीजेपी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि वो राजस्थान बीजेपी के प्रदेशअध्यक्ष पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह को बैठाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के मूड में नहीं है. वसुंधरा इस फैसले को मानने में भले ही और वक्त ले लें.


तनाव बरकरार


पार्टी की सार्वजनिक बैठक में राजस्थान में चुनाव जीतने के तरीकों पर चर्चा हुई और उसके बाद वसुंधरा राजे और अमित शाह ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नाम तय करने को लेकर लंबी बैठक की.


हालांकि बताया जा रहा है कि अभी तक दोनों ही नेता किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं. वसुंधरा राजे और उनके समर्थक राजस्थान सरकार में शामिल मंत्री आज भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं.


PM मोदी की पसंद हैं गजेंद्र सिंह


वसुंधरा गुट के लोग बीजेपी के दूसरे बड़े राष्ट्रीय नेताओं से मिलकर यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद गजेंद्र सिंह बीजेपी के राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सही नहीं हैं. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह भी राजपूत हैं और वसुंधरा राजे भी जाट और राजपूत समाज दोनों से आती हैं. ऐसे में इस पद के लिए किसी दूसरी बिरादरी का नेता होना जरूरी हैं.


बैठक में शामिल नेताओं का कहना है कि बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं ने साफ कर दिया है कि मोदी के पसंद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह का विरोध करने की हिम्मत किसी में नहीं है, लिहाजा वह अपनी लड़ाई खुद लड़ें.


वसुंधरा राजे का डर


राज्य में विधानसभा चुनाव नवंबर में हैं और ऐसे में 60 दिन से ज्यादा हो गए राजस्थान में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है. अब तक किसी के भी प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त नहीं होने से चुनावी रणनीति की तैयारी भी शुरू नहीं हो पाई है और अब अमित शाह के साथ हुई मुलाकात के बाद भी फैसला नहीं होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में बेचैनी है.


गजेंद्र सिंह किसी भी तरह से आगे जाकर उनके लिए कोई खतरा न बन जाएं ये बात वसुंधरा राजे के मन में बैठी हुई है. वसुंधरा गुट को लगता है कि हो सकता है कि पार्टी का शीर्ष कमान गजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश कर दे, लिहाजा वह कभी नहीं चाहेंगी कि केंद्र की तरफ से कोई थोपा हुआ व्यक्ति राजस्थान में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बने.


केंद्रीय नेताओं के साथ मुश्किल यह है कि वह जानते हैं कि राज्य में बीजेपी की ओर से वसुंधरा राजे से ज्यादा लोकप्रिय कोई नेता नहीं है. अगर चुनाव जीतना है तो वसुंधरा ही बीजेपी की नैया पार लगा सकती हैं. दोनों ही एक-दूसरे की कमियों और खूबियों को जानते हैं ऐसे में मामला बराबरी का है और कोई भी एक-दूसरे पर भारी नहीं हो पा रहा है.