नई दिल्ली। राज्यसभा उपसभापति चुनाव में तीन क्षेत्रीय दलों बीजद, टीआरएस और वाईएसआरसीपी की निर्णायक भूमिका को देखते हुए सत्तारूढ़ राजग और विपक्षी पार्टियां इन दलों को लुभाने का प्रयास कर रही हैं। उच्च सदन में भाजपा की पूर्व सहयोगी तेदेपा को मिलाकर विपक्ष के कुल सदस्यों की संख्या 117 है। हालांकि, 245 सदस्यीय सदन में जीतने वाले उम्मीदवार को 122 मतों की जरूरत होगी।

भाजपा उच्च सदन में सबसे बड़ी पार्टी है। उसे 106 सदस्यों का समर्थन हासिल है। इसमें अन्नाद्रमुक के भी 14 सदस्य शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन विपक्ष की तरफ से एक गैर कांग्रेसी, लेकिन कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार उतारने पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस पद के लिए तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और बीजद के प्रसन्न आचार्य के नाम की चर्चा है। बीजद के राज्यसभा में नौ सदस्य हैं। हालांकि, वह भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रख रही है और वह किस तरफ जाएगी इसपर उसने अब तक फैसला नहीं किया है।


इसी तरह , टीआरएस के राज्यसभा में छह और वाईएसआरसीपी के दो सदस्य हैं। उन्होंने भी इस महत्वपूर्ण चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस चुनाव को विपक्ष की एकता के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन तीन पार्टियों के 17 सदस्य राज्यसभा का अगला उपसभापति चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सत्तारूढ़ दल के रणनीतिकार भी इन तीनों दलों के संपर्क में हैं, क्योंकि इन पार्टियों ने पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। बीजद ने हालांकि उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया था।