नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी और पीडीपी की मिली-जुली सरकार बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद गिर गई है, खास बात यह है कि पार्टी के शीर्ष कमान की ओर से किए गए फैसले से पहले राज्य में उनके मंत्रियों को भी इस फैसले की भनक तक नहीं थी.


सोमवार रात को यह खबर आई कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना, पार्टी के महासचिव (संगठन) अशोक कौल और राज्य सरकार में शामिल मंत्रियों को वहां के हालात का जायजा लेने वास्ते अहम बैठक के लिए मंगलवार को दिल्ली आने को कहा है.


फैसले से पहले शाह की NSA से मुलाकात


अपनी पार्टी के लोगों से मिलने से पहले अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी कश्मीर के हालात पर विचार-विमर्श भी किया. शाह और डोभाल के बीच मुलाकात पर यह लगने लगा कि कुछ बड़ा होने वाला है. लेकिन बैठक के लिए दिल्ली आने वाले राज्य के सभी बड़े बीजेपी नेताओं को यह भनक तक नहीं थी कि इतना बड़ा फैसला केंद्रीय नेतृत्व की ओर से लिया जाना है.


इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के सभी बड़े बीजेपी नेताओं की ओर से यह कहा गया कि राज्य सरकार को कोई खतरा नहीं है. हमारा गठबंधन बना रहेगा.


खुद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना था कि यह बैठक 2019 के लोकसभा चुनाव के सिलसिले में बुलाई गई है. आगामी आम चुनाव को लेकर बैठक में चर्चा होगी. इसके अलावा संगठन को लेकर भी बातचीत होगी.


लेकिन बैठक के बाद राज्य में पीडीपी सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान करते हुए बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर सरकार बनी थी, उन सभी बातों पर चर्चा हुई. पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति काफी बिगड़ी है, जिसके कारण हमें ये फैसला लेना पड़ रहा है. इस संबंध में प्रधानमंत्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभी से बात की है.


वहीं राज्य में पीडीपी और बीजेपी की मिली-जुली सरकार गिरने के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अब दो दिवसीय दौरे पर 23 जून को जम्मू जाने वाले हैं.


संघर्ष विराम के दौरान हिंसा बढ़ी


दूसरी ओर, सूत्रों का दावा था कि केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर में रमजान के दौरान लागू किए गए संघर्ष विराम की अवधि आगे नहीं बढ़ने की घोषणा के परिपेक्ष्य में इस बैठक का आयोजन किया गया है.


कुल मिलाकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से बुलाई गई बैठक के अहम मुद्दे को इस कदर गोपनीय रखा गया था कि किसी को कुछ भी भनक नहीं लगा.


राज्य सरकार में हटने का फैसला लिए जाने से पहले जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की. शाह से मुलाकात के दौरान डोभाल ने बताया कि राज्य में आतंकियों पर कार्रवाई के लिए किस तरह के प्लान बनाए गए हैं. घाटी में अब आतंकियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर एक्शन के लिए रोडमैप तैयार किया गया है.


अमित शाह की चाल


दूसरी ओर, सूत्रों के अनुसार, गठबंधन में बड़ा दरार उस समय आता दिखा जब पीडीपी की ओर से दबाव डाला जा रहा था कि अलगाववादियों से बातचीत की जाए, जबकि बीजेपी इसके लिए राजी नहीं थी. बीजेपी का मानना था कि अलगाववादियों से बातचीत करने का अब कोई मौका नहीं बचा है. पिछले कुछ दिनों में घाटी में लगातार बढ़ रही वारदात के बाद माना जा रहा था कि केंद्र कुछ बड़ा और साहसिक कदम उठा सकता है.


फिलहाल जो भी हो, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस फैसले के ऐलान से पहले इसकी गोपनीयता बनाए रखने में कामयाब रहा, हालांकि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत कई लोगों को शाह ने अपने इस चाल से सभी को चौंका भी दिया.