आज अगर आपका भाग्य आपका साथ दे रहा है तो हो सकता है कि घर या कार्यक्षेत्र के खराब वास्तु का असर आपको मालूम न पड़े। लेकिन अगर ग्रह-नक्षत्र बिगड़े तो खराब वास्तु आपकी समस्याओं को कई गुना बढ़ा सकता है। ध्यान रखें, वास्तु एक विज्ञान है और इसका निराकरण केवल वैज्ञानिक तरीके से ही किया जा सकता है…

बात आज की हो या किसी बीते जमाने की। यह बात एकदम सही है कि पूरी तरह वास्तु के अनुसार घर बनाना कभी भी संभव नहीं रहा। कोई न कोई दोष अवश्य रह जाता है। लेकिन आज यहां वास्तुगुरु कुलदीप सलूजा की पुस्तक ‘संपूर्ण सायंटिफिक वास्तु’ से उन तीन अचूक नियमों को बताया जा रहा है, जिनके पालन से आपको वास्तु के कारण कोई गंभीर क्षति नहीं होगी।

आपके प्लॉट का घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व का हिस्सा कभी भी ढका हुआ, दबा हुआ, कटा हुआ, गोल या ऊंचा नहीं होना चाहिए। साथ ही नैऋत्य कोण बढ़ा हुआ और नीचा नहीं होना चाहिए।

घर की चारदीवारी का द्वार या घर का मुख्य द्वार ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) की पूर्वी दीवार पर, ईशान कोण की उत्तरी दीवार पर, अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व का कोना) की दक्षिणी दीवार पर और वायव्य कोण (उत्तर पश्चिम का कोना) की पश्चिमी दीवार पर हो सकता है।

अग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व का कोना) की पूर्व दीवार पर, नैऋत्य (दक्षिण पश्चिम का कोना) कोण की दक्षिण या पश्चिम दीवार पर या वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) की उत्तर दीवार पर घर का मुख्य दरवाजा नहीं होना चाहिए।

बेसमेंट और भूमिगत पानी का स्रोत जैसे कुआं, बोरवेल, टंकी, सेप्टिक टैंक या किसी भी तरह का कोई गड्ढा केवल उत्तर दिशा, पूर्व दिशा या ईशान कोण के एरिया में होना चाहिए। इसके अलावा किसी और दिशा में इसे नहीं होना चाहिए। सेप्टिक टैंक और टॉइलट ईशान कोण में कभी नहीं बनवाने चाहिए।

यदि आप इन तीन नियमों का पालन करते हैं तो आपके घर का वास्तु लाभ की दृष्टि से प्रथम श्रेणी में आ जाएगा। यदि इनमें से कोई भी दोष घर में होगा तो उस घर में रहनेवाले लोगों का जीवन सुखमय नहीं हो सकता।