दुनिया में जैसे भी आर्थिक हालात हों, प्रवासी भारतीयों की कमाई बड़ा हिस्सा स्वदेश भेजना नहीं भूलते। विश्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि 2017 में प्रवासी भारतीयों ने 69 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम स्वेदेश भेजी। यह रकम भारत के रक्षा बजट का डेढ़ गुना है।  वहीं साल 2016 के मुकाबले 2017 में भारतीय प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी गई रकम में 9.5 फीसदी वृद्धि भी हुई है। 


साल 1991 से 22 गुना बढ़ी रकम 

रिपोर्ट के मुताबिक साल 1991 से 2017 के बीच विदेशों से भारतीय द्वारा भेजी जानी वाल रकम 22 गुना तक बढ़ी है। भारतीय 1991 में महज 3 अरब डॉलर स्वदेश भेजते थे जो 2017 में बढ़कर 69 अरब डॉलर हो गई। वहीं वैश्विक स्तर पर प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली रकम 613 अरब डॉलर हो गई। भारत के बाद क्रमश: चीन, फिलीपींस, मेक्सिको, नाइजीरिया और मिस्र रहें जिनको प्रवासियों द्वारा सबसे ज्यादा पैसा भेजा गया। 


केरल राज्यों के बीच सबसे आगे 


प्रवासी भारतीयों द्वारा स्वदेश भेजे जानी वाली रकम में सबसे बड़ी हिस्सेदारी केरल की रही। इंडियास्पेंड की रिपोर्ट 2016 के मुताबिक केरल की हिस्सेदारी 40 फीसदी रही। इसके बाद पंजाब (12.7 प्रतिशत), तमिलनाडु (12.4 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (7.7 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (5.4 प्रतिशत) रहें। 


3 करोड़ से ज्यादा भारतीय विदेश में


मौजूदा समय में 3 करोड़ से ज्यादा भारतीय विदेशों में रह रहे हैं। इनमें सबसे अधिक अमेरिका, सउदी अरब, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हैं।


प्रवासी 2030 तक 6.5 खरब डॉलर भेजेंगे 


विकासशील देशों को 2015 से लेकर 2030 तक करीब 6.5 खरब डॉलर का धनराशि (रिमिटेंस) प्रवासियों से मिलेगा। विदेशों से भेजे गए रकम में से आधा से अधिक  ग्रामीण इलाकों में जाएंगे जहां गरीबी सबसे अधिक है।


अर्थव्यव्स्था के लिए महत्वपूर्ण

प्रवासी लोगों के जरिए विदेशों से भेजा गया पैसा कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह विदेशी निवेश से ज्यादा सुरक्षित व स्थायी भी होता है। यह धन विकासशील देशों में गरीबी हटाने और खुशहाली बढ़ाने का काम करता है।