रायपुर। अंत्यावसासी विभाग ने स्वरोजगार के लिए पिछले तीन सालों में आठ करोड़ रुपये के कर्ज बांटे, लेकिन आज इनमें 90 के करीब ऐसे हितग्राही हैं, जिनके नाम-पते नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि लोन देने से पूर्व पूरी जांच की जाती है। ऐसे में विभागीय अफसरों की भूमिका संदिग्ध है।


डिफाल्टर घोषित हो चुके लोगों की खोजबीन हो रही है। 2016-17 में चार करोड़ रुपए और 2017-18 में दो करोड़ 51 लाख 60 हजार की वसूली करना बाकी है। इसके अलावा 2015-16 में भी दो करोड़ रुपये की वसूली अभी तक नहीं हो पाई।


ज्ञात हो कि अंत्यावसासी विभाग एसी, ओबीसी, सफाई कामगारों को स्वरोजगार के लिए शून्य ब्याज दर पर लोन बैंकों द्वारा देता है, लेकिन हितग्राहियों के वेरीफिकेशन की पूरी जांच विभागीय कर्मचारियों को ही करनी होती है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि लोन में बांट दी गई, लेकिन इसकी रिकवरी करने में अफसरों के पसीना छूटने लगा है।


अभी तक वसूली नहीं हो पाने के पीछे अफसर कोई कारण नहीं बता पा रहे हैं। खास बात यह है कि इसमें स्वरोजगार के लिए हितग्राहियों को ऑटो, ट्रैक्टर भी लोन पर दिए गए हैं। हैरतवाली बात है कि डिफाल्टरों के घर अभी विभाग सूचना आदि नहीं जारी सका है। ऐसे में जाहिर है कि इसकी भरपाई विभागीय कोष ही किया जाना है। सूत्रों के मुताबिक इसका लीड बैंक देना भी इस बारे में कोई जानकारी देने को तैयार नहीं है।


सत्यापन में लापरवाही


अंत्यावसायी विभाग ने हितग्राहियों के सत्यापन में लापरवाही बरती है। इसके चलते इसमें फर्जीवाड़े हुए हैं, जबकि अधिकारियों का कहना है कि बांटे गए लोन के बाद अधिकांश हितग्राहियों के स्वरोगार नहीं फेल हो गए। जिस वजह से ऐसी नौबत आई है। लेकिन इस तरह के तर्क पूरे विभाग की भूमिका संदिग्ध है।


2017-18 में इतने को स्वीकृत किए हैं लोन


2017-18 में एसी वर्ग में 115, ओबीसी में 18, सफाई कामगारों में 80 को अभी तक लोन स्वीकृत किए हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष भी 200 से अधिक लोगों को लोन बांटे गए थे।


कौशल विकास योजना से प्रशिक्षित होने पर लोन का प्रावधान


कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित हितग्राहियों को ही अब लोन देने का प्रावधान बनाया गया है। इसके लिए हितग्राही को उसी क्षेत्र में लोन में मिलेगा, जिसमें वह प्रशिक्षिण लिया हो। इसका सर्टिफिकेट अंत्यावसायी विभाग को देना होता है।


- इसकी रिपोर्ट तलब करूंगा, वैसे रिकवरी की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर की जाती है। - ओपी चौधरी, कलेक्टर, रायपुर