नई दिल्ली, राज्यसभा उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल खत्म हो चुका है. लिहाजा उपसभापति के पद पर अपना उम्मीदवार जिता पाने में असमर्थ मोदी सरकार ने इस चुनाव के माध्यम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नाराज़ घटक दलों को साधने की कवायद तेज़ कर दी है.


भाजपा के एक तीर से दो निशाने


आपको बता दें कि राज्यसभा में 69 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल है. लेकिन हाल के दिनों तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के गठबंधन से बाहर चले जाने और शिवसेना व अकाली दल के तल्ख रवैये को देखते हुए मोदी सरकार के सामने एनडीए का कुनबा बचाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि भाजपा उच्च सदन में अकाली दल से नरेश गुजराल को उम्मीदवार बनाए जाने पर विचार कर रही है. मोदी सरकार की इस रणनीति के पीछे ये मंशा एक तीर से दो निशाना लगाने की है जिससे पहले से नाराज़ अकाली तो सधे ही साथ ही इस दांव के ज़रिए गैर एनडीए दलों यहां तक कि टीडीपी को भी अपने पाले में लाया जा सके.

सर्वसम्मति से चुना जाए उपसभापति


उपसभापति पीजे कुरियन की विदाई के अवसर पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के आवास पर आयोजित टी पार्टी में वेंकैया नायडू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दल सर्वसम्मति से कुरियन के स्थान पर नया उपसभापति चुन लें. उपसभापति वेंकैया नायडू का मानना है कि इस पद अब तक सर्वसम्मति से चुनाव होने की परम्परा है. लिहाजा इसे लेकर किसी भी तरह के टकराव से बचा जाए.


किसकी कितनी ताकत?


245 सदस्यीय राज्यसभा में अपना उपसभापति बनाने के लिए 122 सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए. 69 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल है. एनडीए का 108 सदस्यों के समर्थन का दावा है. जिसमें बीजेपी के 69, एआईएडीएमके के 13, जद(यू) के 6, शिवसेना और अकाली दल के 3-3 सदस्यों के अलावा 6 निर्दलीय और तीन मनोनीत सदस्य शामिल हैं.


वहीं विपक्ष के खेमे में कांग्रेस के 50, टीएमसी और सपा के 13-13, टीडीपी के 6, आरजेडी के 5 और बसपा, एनसीपी व डीएमके के 4-4 सदस्य शामिल हैं. कुछ दल ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं इनमें बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी शामिल हैं जिन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए विपक्ष को ऐसे उम्मीदवार का चयन करना होगा जिसके जरिए सभी गैर एनडीए दलों को एक कनात के नीचे लाया जा सके.