मेरठ, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी हरमप्रीत कौर के लिए फर्जी डिग्री का मामला बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। भारतीय महिला टी20 टीम की कैप्टन हरमनप्रीत मार्कशीट फर्जी होने की पुष्टि के बाद उनकी नौकरी खतरे में पड़ गई है। पंजाब में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) की पोस्ट पर नियुक्त हरमनप्रीत की नौकरी पर तलवार लटक रही है।

मार्कशीट का कोई रिकॉर्ड नहीं

गौरतलब है कि क्रिकेट की दुनिया में शानदार प्रदर्शन करके देश का मान बढ़ाने पर उन्हें रेलवे ने नौकरी दी गई थी और उसके बाद उन्हें पंजाब पुलिस में डीएसपी की नौकरी दी गई थी। सीसीएस विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार जीपी श्रीवास्तव ने आज बताया कि मार्च महीने में पंजाब पुलिस ने सत्यापन के लिए उनकी मार्कशीट मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह (सीसीएस) विश्वविद्यालय भेजी थी। जांच के बाद उनकी बीए फाइनल की मार्कशीट फर्जी पाई गई है। उनकी मार्कशीट का वहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने बताया, “जांच में पाया गया कि मार्कशीट में दर्ज अनुक्रमांक (रोल नंबर) और नामांकन संख्या (एनरोलमेंट नंबर) हमारे रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं।

मुख्यमंत्री के कहने पर पंजाब पुलिस में मिली जॉब

बकौल श्रीवास्तव विश्वविद्यालय ने इस आशय की रिपोर्ट अप्रैल महीने में भेज दी थी। गौरतलब है कि पंजाब के मोगा की रहने वाली हरमनप्रीत को 1 मार्च, 2018 को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने प्रदेश पुलिस में डीएसपी के रूप में ज्वॉइन कराया था। पंजाब पुलिस ज्वॉइन करने से पहले वह पश्चिम रेलवे में कार्यरत थीं। वहां उनका 5 साल का बॉन्ड था। इसके बावजूद उन्होंने पिछले साल नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। हरमनप्रीत को रेलवे में नौकरी करते हुए 3 साल ही हुए थे। ऐसे में बॉन्ड की शर्तों के अनुसार, उन्हें पांच साल का वेतन रेलवे को वापस देना था, इसके चलते उन्हें रिलीव नहीं किया गया था। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष उठाया, इसके बाद ही हरमनप्रीत पंजाब पुलिस में नौकरी ज्वॉइन कर सकी थीं। 

पिता ने जांच को बताया गलत

अब अंतिम जांच रिपोर्ट में डिग्री के फर्जी होने की पुष्टि पर हरमनप्रीत कौर के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जा सकता है। वहीं पंजाब पुलिस नौकरी के लिए वेस्टर्न रेलवे में जमा कराए हरमनप्रीत के शैक्षणिक दस्तावेज की जांच भी कर सकती है। उधर, हरमनप्रीत कौर के पिता हरमिंदर सिंह ने इस जांच को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी की डिग्री सही है। हरमनप्रीत ने इसी डिग्री के आधार पर रेलवे में नौकरी की तो अब यह डिग्री फर्जी कैसे हो सकती है। हरमिंदर सिंह ने कहा कि वे खुद मेरठ जाकर सच पता लगाएंगे। हरमनप्रीत की डिग्री रेगुलर थी या फिर पत्राचार से की गई, पिता ने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। 

हरमिंदर सिंह कहते हैं कि बेटी ने 12वीं की पढ़ाई मोगा से की। उसके बाद हरमनप्रीत का चयन भारतीय महिला क्रिकेट में हो गया तो इस बीच उसने बीए की डिग्री मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से ली। उन्होंने बेटी से फोन पर बात की तो उसने भी डिग्री जाली होने से इनकार किया। वहीं हरमनप्रीत कौर की मां सतविंदर कौर खुलकर नहीं बोलीं। हरमनप्रीत कौर की एक बहन कॉलेज में शिक्षिका हैं।