कोरबा । बारिश के मौसम के साथ ही छत्तीसगढ़ के अधिकांश पावर प्लांटों में कोयले का संकट शुरू हो गया है। जितना कोयला प्रतिदिन आपूर्ति हो रहा, उतना खपत हो जा रहा। इस वजह से स्टाक मेंटेन नहीं हो पा रहा। एनटीपीसी, बाल्को, लैंको तथा विद्युत कंपनी के पूर्व संयंत्र में चार दिन का ही कोयला स्टॉक शेष रह गया है, जबकि नियमतः 15 दिन का स्टॉक होना चाहिए।


एनटीपीसी के 2600 मेगावाट प्लांट को एसईसीएल की गेवरा माइंस से ट्रेन के माध्यम से कोयला आपूर्ति किया जाता है। एसईसीएल से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान में प्रतिदिन 14 रैक यानी 36 हजार टन से ज्यादा कोयला दिया जा रहा। बताया जा रहा है कि प्लांट की सभी इकाई के परिचालन में रहने पर लगभग 37 हजार टन कोयला की जरूरत होती है।


आमतौर पर एनटीपीसी को रोजाना 16 रैक कोयला आपूर्ति की जाती है। तकनीकी दिक्कत की वजह से खदान से रैक घटाकर 14 कर दिया गया है। इससे संयंत्र में कोयला स्टॉक नहीं हो पा रहा। यही स्थिति बाल्को संयंत्र की बनी हुई है। यहां 1200 एवं 540 मेगावाट प्लांट के लिए लगभग 28 हजार टन कोयला की जरूरत होती है। यहां के स्टॉक में सिर्फ छह दिन का कोयला शेष रह गया है।


उधर, ग्राम पताढ़ी स्थित लैंको पावर प्लांट में भी मालगाड़ी से कोयले की आपूर्ति की जा रही है। विद्युत कंपनी के पूर्व संयंत्र में प्रतिदिन 5500 टन कोयला खपत हो रहा है, जबकि मानिकपुर से छह हजार टन कोयला मिल रहा है। इसके बाद भी संयंत्र में केवल चार दिन का 30 हजार टन कोयला स्टॉक में है।


फिलहाल खदानों से नियमित कोयला आपूर्ति होने से किसी भी संयंत्र में उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है। भविष्य में तेज बारिश होने के साथ खदानों में कोयला उत्पादन पर असर पड़ेगा और आपूर्ति बाधित हो सकती है। यही चिंता पावर प्लांटों के प्रबंधन को सता रही। स्टॉक नहीं रहने पर बिजली उत्पादन प्रभावित होगा।




देश भर में यही हाल


जानकारों का कहना है कि देश के कई ताप विद्युत संयंत्र में कोयला का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। कुछ राज्यों ने कोयला की समस्या से केंद्र सरकार को अवगत कराया था। इसके बाद सीआइएल की सभी कंपनियों को कोयला आपूर्ति करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही स्टॉक में रखा कोयला भी लगातार डिस्पैच किया जा रहा है। फिर भी मांग के सापेक्ष कोयला की कमी बनी हुई है।