उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने वाला उपभोक्ता फोरम पांच महीने से जज विहीन है। ऐसे में मामलों की पैरवी से निपटारे तक की प्रक्रिया धीमी हो गई है। ठगी का शिकार होने वाले उपभोक्ताओं में इससे निराशा है। स्थिति को संभालने के लिए भदोही के जज को वाराणसी कोर्ट से संबद्ध किया गया है। लेकिन इससे बात नहीं बन रही। 

संबद्धता से चल रहा काम
फोरम में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मार्च में भदोही के जज को वाराणसी से संबद्ध कर दिया गया। वह हर महीने की 16 से 30 तारीख तक बनारस के कोर्ट में बैठते हैं। लेकिन इससे समस्या का समाधान संभव नहीं हो पा रहा है। 

दो सदस्यों के पद, पर वो भी खाली 
कोर्ट में एक जज के साथ दो सदस्यों के भी पद हैं। जो खाली है। पुरुष सदस्य का पद 2016 से खाली है वहीं महिला सदस्य के पद पर चंदौली के सदस्य को संबद्ध किया गया है। इससे भी कोर्ट की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पद खाली होने पर नई तैनाती की प्रक्रिया धीमी होने से मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। 

निस्तारण की संख्या 50 से 15 हो गई
अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2017 दिसंबर तक हर महीने 50 से 55 मामलों के निस्तारण हो रहे थे। जो फरवरी 2018 से 15 से 18 पर अटक गई है। उपभोक्ता फोरम के मामले देखने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि बिना जज के मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है। वादी को लंबी तारीख दी जा रही है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।