गोरखपुर गोरखपुर में इस समय एंटी रैबीज वैक्सीन(एआरवी) के लिए हाहाकार मचा है। सरकारी अस्पताल में एआरवी खत्म है। बीआरडी मेडिकल कालेज भी हाथ खड़ा कर चुका है। दवा बाजार से भी एआरवी गायब है। इसे लेकर मरीज परेशान हैं। बुधवार को एआरवी के लिए जिला अस्पताल में हंगामा भी हो गया।


गर्मी का असर गली में घूमने वाले आवारा व पालतू कुत्तों को बेचैन कर रहा है। कुत्ते लोगों पर हमला कर रहे हैं। अस्पताल में 40 फीसदी केस पालतू कुत्तों के आ रहे हैं। नवजात बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। सर्वाधिक संख्या किशोरों की है।


यही कारण है कि इन दिनों जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने वालों की भीड़ लगी हुई है। जिला अस्पताल के एआरवी सेंटर में रोजाना 230 से अधिक मरीज रोजाना इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि अस्पताल में स्टॉक खत्म हो गया है। फुटकर बाजार में इक्का-दुक्का दुकानों पर ही यह इंजेक्शन मौजूद है।


दो गुना हुआ एआरवी का खर्च


जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट हेमन्त कुमार ने बताया कि पिछले साल चिरान और रैबीप्यूर कंपनी एआरवी की आपूर्ति करती थी। उसका एक वॉयल करीब 170 रुपए में मिलता जिससे चार मरीजों को इंजेक्शन लगता। शासन ने दोनों कंपनियों की आपूर्ति पर रोक लगा दी। अब भारत-सीरम एआरवी सप्लाई कर रही है। इसके वॉयल की कीमत मामूली कम है। मगर इससे सिर्फ दो मरीजों को ही एआरवी लग रही है।


थोक बाजार में डिमांड 5000 वॉयल की सप्लाई 1200 वॉयल


दवा के थोक बाजार भालोटिया में एआरवी खत्म हैं। एआरवी सप्लाई करने वाली सूर्या फार्मा के संचालक दिलीप सिंह ने बताया कि सबसे बेहतरीन एआरवी ग्लैक्सो कंपनी की रैबीप्यूर मानी जाती है। ज्यादातर डॉक्टर इसे ही लगवाने की सलाह देते हैं। इसकी हर महीने करीब 500 वॉयल की सिर्फ एक एजेंसी से मांग हैं। जबकि कंपनी तीन महीने में सिर्फ 118 वॉयल ही सप्लाई कर सकी है। बबाजार में हर महीने 5000 से अधिक वॉयल एआरवी की मांग है। जबकि आपूर्ति अधिकतम 1200 वायल की ही है। रोजाना फुटकर दुकानदार मांग भेज रहे हैं।


फुटकर बाजार में है एआरवी की किल्लत


दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि भालोटिया मंडी के थोक व्यापारियों को निर्माता फर्म से मांग के मुताबिक आपूर्ति नहीं मिल रही है। ऐसे में थोक व फुटकर व्यापारियों ने लखनऊ के अमीनाबाद और वाराणसी के लंका स्थित थोक दवा मंडी के व्यापारियों से संपर्क किया है। दोनों ही जगह दवा की शार्टेज है।


गर्दन के उपर काटे तो इम्यूनोग्लोबीन लगवाए


आमतौर पर कुत्तों के काटने पर मरीजों को चार डोज लगाया जाता है। कुत्ता अगर गर्दन के उपर हमला करे तब ज्यादा खतरा होता है। ऐसे मरीजों को एआरवी की फुल डोज के साथ ही इम्यूनोग्लोबीन का इंजेक्शन भी लगाया जाता है।


एआरवी की किल्लत बीते एक महीने से बनी हुई है। इस समय तो इंजेक्शन का स्टॉक खत्म हो गया है। फर्म को तीन बार आर्डर भेजा जा चुका है। इसके बावजूद फर्म सप्लाई नहीं कर रही है। बुधवार को हंगामे के बाद एक बार फिर से आर्डर भेजा गया है।


डॉ. राजकुमार गुप्ता, एसआईसी, जिला अस्पताल