रायपुर। केंद्र सरकार ने धान समेत खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा तो दिया लेकिन किसान संगठन इससे खुश नहीं हैं। सरकार कह रही है कि हमने अपना वादा निभाया। किसानों को लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दे रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ के किसान संगठनों का कहना है कि एमएसपी के नाम पर चुनावी लालीपॉप थमाया गया है।


छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने कहा है कि सरकार बताए किस नीति और फार्मूले के तहत धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया गया है। किसान कह रहे कि सरकार मुगालते में न रहे कि दो सौ रुपये की खैरात देकर वे दोबारा सत्ता में आ जाएंगे।


किसान नेता राजकुमार गुप्त ने कहा भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणापत्र में स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसा के अनुसार लागत मूल्य सी-2 में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य घोषित करने का वादा किया था। अब सिर्फ दो सौ रुपये बढ़ाया गया है।


इस बात की कोई गारंटी नहीं दी गई है कि इस मूल्य से कम में कोई खरीदी नहीं होगी। इधर छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के प्रवक्ता जागेश्वर प्रसाद ने इसे चुनावी लालीपॉप बताते हुए कहा कि सरकार ने स्वीमीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है।


किसान नेता और कृषि वैज्ञानिक संकेत ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार किसानों के साथ छल कर रही है। पांच साल पहले वादा किया था कि धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रुपये प्रति क्विंटल देंगे और तीन सौ रुपये बोनस देंगे।


इस तरह प्रति क्विंटल धान का 24 सौ रुपये देने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने तीन से चार प्रतिशत की वृद्घि ही की है। किसानों को 24 सौ के बदले 1750 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलेगा। स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुसार इसका मूल्य 41 सौ रुपये होना चाहिए।


एमएसपी की घोषणा शरारतपूर्ण-


किसान संगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी एमएसपी के फार्मूले का विरोध किया है। कांग्रेस ने इसे छलावा बताया तो मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने एमएसपी की घोषणा को शरारतपूर्ण करार दिया है।


सीपीएम ने कहा है कि सरकार ने सी-2 फार्मूले के तहत एमएसपी देने की बात की थी लेकिन ए-2 एफएल फार्मूले पर तय किया है। इसमें जमीन का किराया व कृषि में किसान और उसके परिवार की मेहनत-मजदूरी को शामिल नहीं किया गया है।


इतना होना चाहिए एमएसपी-


सीपीएम ने सी-2 फार्मूले के हिसाब से कितना रेट होना चाहिए इसकी सूची भी जारी की है। इसके मुताबिक धान का एमएसपी 2340 रुपये, ज्वार का 3275, रागी का 3555, मक्का का 2220, अरहर का 7472, उड़द का 7484, मूंग का 9242, मूंगफली का 6279, सोयाबीन का 4458 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि जो दरें तय की गई हैं वह कृषि मूल्य निर्धारण आयोग द्वारा तय वास्तविक उत्पादन लागत और भाजपा सरकारों द्वारा भेजी गई सिफारिशों से भी 18 से 31 प्रतिशत नीचे नीचे हैं।