शास्त्रों के अनुसार,  पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर के राजतिलक में भगवान कृष्ण भी पधारे। राजतिलक के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने युद्धिष्ठिर को राज्य और घर की समृद्धि के लिए कुछ नियम बताए, जिनमें वास्तु से संबंधित विचार भी थे…

महाभारत में कृष्ण-युधिष्ठिर संवाद में बताया गया है कि भगवान कृष्ण ने उन्हें घर में पांच चीजें मुख्य रूप से रखने के लिए कहा, जिससे घर में धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कान्हा ने युधिष्ठिर से कहा कि साम्राज्य में पीने के पानी की उचित व्यवस्था सदैव रहनी चाहिए। कभी कोई व्यक्ति पानी के अभाव में दुखी न हो। पौराणिक से ही किसी प्यासे को पानी पिलाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता है। इसी कारण से हिंदू संस्कृति में पूजा के दौरान भगवान सूर्य के पश्चात सभी देवी-देवताओं को जल अर्पित करने का नियम बनाया गया है।

भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को पौराणिक कथन को याद दिलाते हुए कहा कि जिस प्रकार हजारों विषैले सर्पों के लिपटे रहने के बाद भी चंदन वृक्ष की सुगंध तनिक भी कम नहीं होती है, ठीक उसी प्रकार चाहे घर पर कितनी ही नकारात्मक शक्तियों की नजर क्यों न हो, चंदन रखने से सभी बुरी शक्तियों से आपकी रक्षा होती है।

शास्त्रों में गाय को सबसे पूजनीय माना गया है, इसलिए उसके दूध से बने घी से घर में प्रतिदिन दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से आपके घर पर देवताओं की कृपा बनी रहती है। इसके सेवन से आप स्वस्थ बने रहते हैं।

भगवान कृष्ण ने बताया कि जिस तरह से माता सरस्वती कीचड़ से निकले कमल पर विराजमान होने के बाद भी उस कीचड़ से अछूती बनी रहती हैं, ठीक उसी प्रकार घर में माता सरस्वती का पूजन व्यक्ति को निर्धनता और अनिश्चितता से बचाता है। इसके लिए घर में माता सरस्वती की मूर्ति या उनके वाद्ययंत्र वीणा को रखना चाहिए।

युधिष्ठिर को सुख-समृद्धि के उपाय बताते हुए भगवान कृष्ण ने कहा कि शहद एक ऐसा पदार्थ है, जिससे न केवल आपकी आत्मा शुद्ध होती है, बल्कि इसे घर में रखने से वहां का वातावरण भी स्वच्छ हो जाता है। दरअसल शहद में इतनी खूबियां या कहें सकारात्मक शक्ति होती है कि वह आपके घर में मौजूद कैसे भी नकारात्मक तत्व को नष्ट कर सकता है।

कान्हा आगे कहते हैं कि शहद को हमेश स्वच्छ जगह पर रखना चाहिए। परिवार के सभी व्यक्तियों को हर रोज शहद का सेवन करना चाहिए। यह सेहत और मन दोनों को दुरुस्त रखने में सहायक है।