जोधपुर.सरकार ने गर्भवतियों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जननी सुरक्षा योजना के तहत अलग से एंबुलेंस 104 चला रखी है लेकिन सरकारी कर्मचारी और चालक इसे चलाने में लापरवाही बरत रहे हैं। गर्भवती का गांव से शहर के अस्पताल छोड़ने निकली एंबुलेंस ने बीच रास्ते एक अफसर को तो बिठाया ही, अफसर ने पहले खुद को होटल ड्रॉप करने के लिए दबाव डाला। केतु कलां निवासी मुकेश की गर्भवती पत्नी को पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत पीएचसी से जोधपुर रैफर किया था। 104 जननी सुरक्षा एक्सप्रेस से वह उम्मेद अस्पताल के लिए निकलीं। 54 मील पर बालेसर ब्लाॅक के ईएमई राजूसिंह राजपुरोहित एंबुलेंस को रुकवाकर सवार हो गए। जोधपुर पहुंचने पर उन्होंने चालक को पहले जबरन रातानाडा स्थित निजी होटल में ड्रॉप करने को कहा। पीछे गर्भवती तड़प रही थी, परिजनों ने हाथ जोड़े लेकिन लेकिन राजपुरोहित पद और काम का हवाला देकर जबरन एंबुलेंस पहले होटल ही ले गए।


जो अफसर ने कहा, वहीं तो मैंने किया : चालक


एंबुलेंस में जीवीके ईएमआरआई की ओर से बालेसर ब्लॉक में एंबुलेंस के सही संचालन के लिए तैनात इमरजेंसी मैनेजमेंट एक्जीक्यूटिव बैठे थे। अब हमें तो अधिकारी जो बोलेंगे, वही करना पड़ता है। उन्होंने पहले होटल छोड़ने काे कहा तो मैंने वही किया। उनकी बात कैसे नहीं मानता?


हम कहते रहे इमरजेंसी है, पर नहीं माने : परिजन

गर्भवती महिला के पति मुकेश ने बताया कि इमरजेंसी थी इसलिए रेफर किया। फिर भी एंबुलेंस सीधे अस्पताल लाने की बजाय पूरे शहर में घुमा कर उम्मेद अस्पताल लेकर आई। काफी गुहार लगाई, लेकिन नहीं सुनी। पूछा तो चालक ने बताया कि वह उनका अधिकारी था, इसलिए बात मानी।


एंबुलेंस के जीपीएस से मामले की सत्यता जांचेंगे:घटना सही है। अधिकारी एंबुलेंस में बैठकर आ-जा सकते हैं, लेकिन मरीज पहले छोड़ना चाहिए था। एंबुलेंस के जीपीएस से मामले की सत्यता जांचेंगे। अधिकरी दोषी होगा तो कार्रवाई भी करेंगे। -भानु सोनी, पीआरओ, जीवीके ईएमआरआई


स्पष्टीकरण लिया जाएगा :एंबुलेंस संचालक कंपनी को सरकार पैसे देती है, न कि उनके अफसरों को। अगर अधिकारी आ भी रहा है तो पहली प्राथमिकता मरीज को छोड़ना ही होनी चाहिए। इसके लिए कंपनी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। - डॉ. सुरेंद्रसिंह चौधरी, सीएमएचओ