कोटा | अब न्यूक्लियर या बायोलॉजिकल अटैक जैसी आपदा से निपटने में भी कोटा सक्षम होगा। इसके लिए कोटा में प्रदेश का पहला सीबीआरएन (केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल व न्यूक्लियर) सेंटर खुलेगा। यह एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल होगा, जहां इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए ट्रेंड टीम होगी। भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सीबीआरएन सेंटर के लिए कोटा का चयन किया है।


रावतभाटा में आरएपीपी साइट नजदीक होना माना जा रहा बड़ी वजह:इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि कोटा के नजदीक ही रावतभाटा में आरएपीपी साइट है, जहां परमाणु ऊर्जा से बिजली बनती है। इसके लिए केंद्र ने राज्य सरकार से कोटा में 2500 वर्ग मीटर जमीन की मांग की है। जमीन ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां नजदीक ही ट्रोमा सेंटर व इमरजेंसी सुविधाएं हों। इसके चलते नए अस्पताल के परिसर में यह जमीन चिह्नित की गई है। कोटा मेडिकल कॉलेज के स्तर पर इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया जा चुका है।


करीब 80 करोड़ रुपए आएगी लागत:लगातार हो रहे जैविक या रासायनिक हमले तथा जापान में भूकंप के दौरान फुकुशिमा में हुए न्यूक्लियर विध्वंस को देखते हुए भारत सरकार ने देश के चुनिंदा साइट्स पर ऐसे सेंटर डवलप करने की योजना बनाई है। देश में कुछ जगहों पर ऐसे सेंटर चल भी रहे हैं। कोटा में भी इसी तर्ज पर सेंटर विकसित किया जाएगा। इस सेंटर में कार्यरत टीम देश की उन सभी संस्थाओं से प्रशिक्षण प्राप्त होगी, जो इन क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इस सेंटर पर करीब 80 करोड़ रुपए खर्च होंगे, हालांकि अभी लागत से जुड़ा ब्यौरा सरकार को नहीं मिला है।


अभी गाइडलाइन नहीं अाई:राज्य सरकार से हमें इसकी सूचना मिली है और इसके लिए नए अस्पताल परिसर में साइट सलेक्शन किया गया है। इसकी विस्तृत गाइडलाइन अभी आना शेष है, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।- डॉ. गिरीश वर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज