मुंबई ।  नेशनल कंपनी लॉ ट्र‍िब्यूनल (एनसीएलटी) ने टाटा संस के पक्ष में फैसला सुना दिया है और सायरस मिस्त्री की याचिका खारिज कर दी है। मिस्त्री ने चेयरमैन पद से हटाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सायरस मिस्त्री पर जानकारी लीक करने का आरोप था। एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा कि बोर्ड के पास पद से हटाने का अधिकार है। ट्र‍िब्यूनल ने रतन टाटा के खिलाफ लगाए गए आरोप को खारिज कर दिया है और कहा कि टाटा ग्रुप मैनेजमेंट में कोई गड़बड़ी नहीं है। मिस्त्री की ओर से दिसंबर 2016 में दायर याचिका में टाटा ग्रुप की ऑपरेटिंग कंपनियों में रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट्स के एन ए सूनावाला के हस्तक्षेप के कारण टाटा संस में गवर्नेंस कमजोर होने और बिजनेस को लेकर गलत फैसले किए जाने का आरोप लगाया था। मिस्त्री ने टाटा संस के बोर्ड में शापूरजी पालोनजी ग्रुप को उपयुक्त प्रतिनिधित्व देने, टाटा संस के मामलों में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टीज के हस्तक्षेप को रोकने, टाटा संस को प्राइवेट कंपनी में तब्दील होने से बचाने और टाटा संस में सायरस मिस्त्री फैमिली फर्मों के शेयर्स को जबरदस्ती ट्रांसफर करने की अनुमति न देने की मांग की थी।