नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में रियायती दर पर जमीन पाने वाले सभी निजी अस्पतालों को निश्चित संख्या में गरीब रोगियों की चिकित्सा मुफ्त में करने को कहा है। अस्पतालों को अत्यंत सस्ती दर पर दी गई जमीन के लीज डीड में गरीबों को चिकित्सा मुहैया कराना शामिल है। निजी अस्पतालों के लिए सरकार द्वारा आवंटित जमीन पर 10 फीसद इन पेशेंट विभाग (आईपीडी) और 25 फीसद आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) में मुफ्त में चिकित्सा मुहैया कराना अनिवार्य है।


जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अस्पतालों द्वारा विरोध करने पर लीज निरस्त किया जा सकता है। पीठ ने दिल्ली सरकार से आदेश के अनुपालन पर समय-समय पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। पीठ ने कहा कि वह इस बात पर नजर रखेगी कि निजी अस्पताल गरीबों का मुफ्त में इलाज कर रहे हैं या नहीं। एनजीओ सोशल जुरिस्ट की ओर से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि फैसले के ब्योरे की प्रतीक्षा है, लेकिन पीठ ने अपनी घोषणा में हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया है।


चार अस्पतालों मूलचंद अस्पताल, सेंट स्टीफन अस्पताल, रॉकलैंड अस्पताल और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च ने 2012 में दिल्ली सरकार एवं भूमि एवं विकास कार्यालय के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट में अस्पतालों ने 2014 में उल्लेख किया था कि लीज की शर्तों में बदलाव किया जा सकता है। अस्पतालों ने लीज डीड और कानून में संशोधन की दलील दी थी।