बस्ती निर्भया कांड के एक आरोपी पवन गुप्ता उर्फ कालू के पैतृक गांव जगन्नाथपुर ने खामोशी से सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी की सजा बहाल रखने के फैसले को स्वीकार कर लिया। परिवार में केवल महिलाएं हैं। पवन की दादी मेवाती देवी को हमेशा से उसके बरी होने की उम्मीद रहती थी, लेकिन उम्मीदों के बीच जनवरी 2018 में उनकी मौत हो गई। 


बस्ती के कुदरहा विकास खंड स्थित जगन्नाथपुर निवासी पवन गुप्ता के पिता हीरालाल परिवार के साथ दिल्ली में रहकर व्यवसाय करते थे। पवन भी उनका साथ देता था। दो भाई व दो बहन में वह सबसे बड़ा था। पिता ने महादेवा के चौराहे के पास हटवा गांव में भी एक जमीन लिया और उस पर मकान बनाना शुरू किया था। 16 दिसम्बर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद से काम ठप हो गया और मौजूदा समय वह खंडहर जैसा दिखता है। 


निचली अदालत ने 10 सितम्बर 2013 में जब उसे फांसी की सजा सुनाई तो गांव में लोगों ने समर्थन किया लेकिन दादी ने उसके छूटने की बात की थी। 13 मार्च 2014 में हाईकोर्ट व 27 मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा बरकरार रखी। 


अब दया याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पवन के चाचा जुग्गीलाल व सुभाषचन्द्र भी दिल्ली में रहकर काम करते हैं। उनके परिवार के सदस्य गांव जगन्नाथपुर में रहते हैं। निर्भया कांड के बाद मां मेवाती देवी की मौत पर पवन के पिता एक बार अपने गांव जगन्नाथपुर आए। मां के क्रिया-कर्म के बाद वह लौट गए। फांसी की सजा बरकरार रखने पर गांव में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। अलबत्ता हर किसी ने खामोशी से फांसी की सजा को स्वीकार कर लिया।