गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए जाने का सरकार का निर्णय खुद मदरसों के लिए ही परेशानी का सबब बन गया है। अप्रैल में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाने के बावजूद मदरसों को अब तक एनसीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। दूसरी ओर शासकीय सहायता प्राप्त मदरसों को सर्वशिक्षा अभियान के तहत कक्षा एक से आठ तक की किताबें मुफ्त उपलब्ध कराए जाने के क्रम में पुराने पाठ्यक्रम की पुस्तकें सोमवार से उपलब्ध कराने का सिलसिला शुरू हुआ है।


राज्य सरकार ने पिछली मई में मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें लागू किए जाने का आदेश दिया था। लेकिन सर्वशिक्षा अभियान चलाने वाला बेसिक शिक्षा विभाग मदरसों को एनसीईआरटी की पुस्तकें देगा या नहीं, इस पर निर्णय नहीं हो सका है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों के पास अभी सर्वशिक्षा अभियान के तहत बेसिक बोर्ड की किताबें ही पहुंची हैं। लिहाजा संदेह है कि बेसिक शिक्षा विभाग एनसीईआरटी की किताबें देगा या नहीं?


गोरखपुर जिले में 10 अनुदानित मदरसें हैं जिनमें तकरीबन 4 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार गोरखपुर के प्रधानाचार्य हाफिज नजरे आलम कादरी बताते हैं कि अध्ययनरत बच्चों के मुकाबले काफी कम किताबें मिली हैं। दूसरे किताबें एनसीईआरटी की भी नहीं हैं। मदरसा जिलाउल उलूम पुराना गोरखपुर के प्रधानाचार्य मौलाना नुरुज्जमा मिस्बाही की भी यही शिकायत है। मदरसा अंजुमन इस्लामियां खूनीपुर के प्रधानाचार्य डा. रफीउल्लाह बेग कहते हैं कि एनसीईआरटी की किताबें न मिलने से असमंजस की स्थिति बन गई है। सवाल है कि क्या परीक्षाएं भी बेसिक शिक्षा बोर्ड की किताबों से ही होंगी?


कुछ विषयों एवं कुछ छात्रों को ही मिल रही किताबें


मदरसों को कक्षावार जितनी पुस्तकों की जरूरत है, उतनी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। दूसरे सभी विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मदरसों के शिक्षक एवं प्रधानाचार्य परेशान हैं। असल में मदरसों में पढऩे वाले ज्यादातर बच्चे गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले परिवार से हैं। शिक्षण सत्र अप्रैल से ही शुरू हो चुका है। ऐसे में वे बाजार से एनसीईआरटी की किताबें कैसे खरीदेंगे? यह बड़ा सवाल है।


‘‘ प्रदेश के 560 अनुदानित मदरसों को सर्वशिक्षा अभियान के तहत किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। शेष मदरसों के विद्यार्थियों को वे पुस्तकें खरीदनी होंगी। एनसीईआरटी के जिम्मेदार लोगों से बात कर और एक पत्र लिख कर मदरसों में पढ़ाने के लिए जरूरी किताबों की अनुमानित संख्या के बारे में अवगत कराया था। ताकि पुस्तकें छपने और उनकी उपलब्धता में कोई परेशानी ना हो।


राहुल गुप्ता, रजिस्ट्रार, मदरसा शिक्षा बोर्ड