श्रीमाधोपुर. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए श्रीमाधोपुर के लोकेंद्र सिंह शेखावत का सोमवार को उनके गांव नाथूसर मे अंतिम संस्कार किया गया। वे बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उनके घर पहुंचा। अंतिम संस्कार के पहले लोकेंद्र को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। साथ ही हजारों संख्या मे बाइक सवार ने उन्हे श्रद्धांजलि दी। रविवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में लोकेंद्र शहीद हो गए थे।


- वर्ष 2012 में लोकेंद्र सिंह बीएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे बीएसएफ की बीएन बीएसएफ-114 बटालियन में छतीसगढ़ के कांकेर जिले में तैनात थे। रविवार को ही लोकेंद्रसिंह के बेटे का जड़ूला था। गांव के लोगों ने बहाना बना कार्यक्रम टलवाया। जिसके बाद सोमवार सुबह 10 बजे राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया।



घर में गाए जा रहे थे मुंडन के लिए गीत


- रविवार सुबह परिवार लोकेंद्र सिंह के छह महीने के पुत्र दक्ष प्रताप सिंह का जड़ूला उतारने के लिए भैरूंजी के जाने की तैयारी कर रहे थे। इसे लेकर घर में खुशियों का माहौल था। मुंडन रस्म के मंगलगीत गाए जा रहे थे। अचानक शहादत का समाचार मिलते ही ग्रामीणों ने बहाना बनाकर बच्चे के मुंडन रस्म का कार्यक्रम रुकवा दिया। सिर्फ लोकेंद्र के बड़े भाई को शहादत की जानकारी दी गई थी।


20 दिन पहले ड्यूटी पर गए थे, कहा था- 5 अगस्त को गृह प्रवेश में आऊंगा


परिजनों ने बताया कि लोकेंद्र सिंह एक महीने की छुट्टियों के बाद 20 दिन पहले ही पिता महेंद्र सिंह और बड़े भाई कुलदीप सिंह को पांच अगस्त को वापस घर आकर नवनिर्मित घर के गृह प्रवेश कार्यक्रम करने की बात कहकर ड्यूटी पर गए थे। उन्हें क्या पता था कि अब वापस उनकी शहादत का समाचार ही आएगा।


ढाई साल पहले हुआ था विवाह


- लोकेंद्र सिंह का विवाह दिसंबर 2015 में नागौर जिले की अनु कंवर के साथ हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि लोकेंद्र सिंह मिलनसार थे। छुट्टी आने के बाद गांव में सबसे मिलना-जुलना और बड़े-बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जानकारी लेना उनका प्रमुख काम था।