बिजनस को लेकर अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि लाख मेहनत और प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलती। अगर आपको भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है तो इसका सिर्फ एक ही कारण हो सकता है और वो है वास्तु असंतुलन होना। यदि कार्यस्थल का वास्तु सही नहीं है तो समय खर्च करने के बाद भी लाभ को लेकर निराशा जनक स्थिती बनी रहती है। आज हम आपको बताते हैं वास्तु के अनुसार कैसा होना चाहिए आपका व्यापार स्थल….

वास्तु विज्ञान के अनुसार, अगर आपके ऑफिस या दुकान में सीढ़ियां बनी हुई है तो इस बात का ध्यान रखें कि सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए।

व्यापार में बेहतर लाभ पाने के लिए सबसे पहले तो ध्यान रखें कि दुकान या ऑफिस की दीवारों का रंग गहरा ना हो। वह सफेद, क्रीम या फिर दूसरे हल्के रंगों हो, इससे सकारात्मक उर्जा का संचार करता है जो लाभ वृद्धि में सहायक होता है।

दुकानों में उत्तर एवं पश्चिम दिशा की ओर शोकेस का निर्माण करवाना चाहिए। इससे खरीदारों की संख्या बढ़ती है। साथ ही कार्यालय का प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व की ओर रखें और सभी केबिनों के द्वार अंदर की ओर खुलने चाहिए।

ध्यान रहे कि दुकान या ऑफिस में आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ हो तो बेहतर है। अगर यह संभव नहीं है तो आप पश्चिम की तरफ भी मुंह किया जा सकता है। लेकिन भूलकर भी अपनी कुर्सी इस तरह न रखें कि काम करते समय आपका मुंह दक्षिण की तरफ हो।

दुकान में पैसे रखने की जगह इस तरह निर्धारित की जाए कि जब अलमीरा या रैक खुले तो उत्तर की तरफ उसका मुंह हो। साथ ही बिक्री काउंटर पर सेल्समैन का मुंह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए।

दुकान या शोरूम में सभी बिक्री का सामान हमेशा दक्षिण, पश्चिम या फिर वायव्य दिशा में होनी चाहिए। उत्तर और पश्चिम दिशा के मध्य के कोणीय स्थान को वायव्य दिशा का नाम दिया गया है। इस दिशा का मुख्य तत्व वायु है।

वास्तु के अनुसार, दुकान या कार्यक्षेत्र का बीच का भाग खुला होना चाहिए। बाकी जगहों की तुलना में इस दिशा में कम से कम सामान रखना चाहिए। यदि आपकी दुकान है तो कोशिश करें कि ग्राहक के निकलने का रास्ता साइड से न होकर बीच से हो।

अगर आपके केबिन या दुकान में छोटा-सा मंदिर बना है तो यह मंदिर आपकी कुर्सी के पीछे नहीं होना चाहिए। मतलब, जब आप बैठें तो आपकी पीठ मंदिर की तरफ नहीं होनी चाहिए। यह अशुभ है, हमेशा मंदिर को आंखों का सामने रखना चाहिए। इससे सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।