बनारस में मालवीय पुल के पास ‘सिग्नेचर ब्रिज’ बनाया जायेगा। यह हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर होगा। इसके डीपीआर की जिम्मेदारी एनएचएआई को दी गई है। एनएचएआई के डीपीआर पर रेलवे काम करायेगा। इंटर मॉडल स्टेशन के कारण पूर्व में मालवीय पुल के समानांतर बनने वाले रेल ब्रिज में बदलाव कर इसे सिग्नेचर ब्रिज का रूप दिया गया है। इसके लिए सर्वे शुरू हो चुका है।


वर्ष 2017-18 के आम बजट में मालवीय पुल के समानांतर रेल ब्रिज बनाते हुए वाराणसी से मुगलसराय के बीच तीसरी लाइन बिछाने के लिए 2005 करोड़ 15 लाख रुपये दिये गये, जिसमें से एक करोड़ रुपये डीपीआर बनाने के लिए जारी किया गया। रेलवे के लखनऊ मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने डीपीआर तैयार कर बोर्ड को भेज दिया था। इसी बीच काशी स्टेशन पर इंटर मॉडल स्टेशन का प्लान आया, जिसे एनएचएआई विकसित करेगा। इंटर मॉडल स्टेशन के प्लान के कारण रेल ब्रिज में बदलाव का निर्णय लिया गया। अब इंटर मॉडल स्टेशन से लगते हुए सिग्नेचर ब्रिज बनाया जायेगा। इस सिग्नेचर ब्रिज पर ट्रेन के अलावा सड़क यातायात भी होगा।


पर्यटन को लेकर हुआ बदलाव

काशी स्टेशन पर ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित होने वाला इंटर मॉडल स्टेशन पर्यटन का भी केंद्र होगा। इसी कारण मालवीय पुल के समानांतर बनने वाले रेल ब्रिज में बदलाव किया गया है।


कचहरी से होकर जायेगी तीसरी लाइन

वाराणसी कैंट और मुगलसराय के बीच बिछाई जाने वाली तीसरी लाइन कचहरी की तरफ से होकर जायेगी। इसकी कुल लंबाई 16.72 किलोमीटर होगी, जो सिग्नेचर ब्रिज से होकर जायेगी। 


हावड़ा ब्रिज एक नजर 

हावड़ा और कोलकाता को जोड़ने वाला यह ब्रिज हुगली नदी पर 1937 से 1943 के बीच बनकर तैयार हुआ। कैन्टीलीवर झूला पुल पर बनाये गये सेतु पर प्रतिदिन औसतन  1,50,000 वाहन और  40,00,000 पैदल यात्री गुजरते हैं।


मालवीय पुल के समानांतर बनने वाले रेल ब्रिज में बदलाव होगा। इसके लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। 

- सतीश कुमार, डीआरएम, लखनऊ 


ब्रिज निर्माण के लिए सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही डीपीआर तैयार कर रेलवे को सौंप दिया जाएगा। 

एसबी सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर- एनएचएआई