जयपुर, राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों द्धारा रकबर की हत्या के मामले में वसुंधरा राजे की पुलिस पर सवाल खड़े होने लगे हैं. गो तस्करी के आरोप में कथित गोरक्षकों ने रकबर खान नाम के एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला था. इस पूरे मामले पर पुलिस की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं. पुलिस अगर समय पर रकबर को अस्पताल ले जाती तो उसकी जान बच सकती थी. दरअसल रकबर का इलाज करने वाले डॉक्टरों और पुलिस को घटना की जानकारी देने वाले के बयान से तो ऐसा ही लग रहा है.


पुलिस को रकबर पर हमले की जानकारी 12 बजकर 40 मिनट पर मिली थी, लेकिन पुलिस उसको इलाज के लिए 3 बजे अस्पताल लेकर पहुंचती है. ऐसे में सवाल उठता है कि 2 से 2.30 घंटे तक रकबर कहां था.


पुलिस के मुताबिक 12.40 पर सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंच गई थी. पुलिस को सूचना देने और पुलिस के साथ गाड़ी में जाने वाले नवलकिशोर शर्मा ने कहा रात को एक बजे पुलिस घायल को रामगढ़ थाने में लेकर पहुंची. लेकिन रकबर का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है पुलिस उसे सुबह 3 बजे अस्पताल लेकर आई थी. ऐसे में पुलिस पर सवाल उठ रहा है कि दो घंटे अकबर कहां था.


थाने में रकबर के साथ हुई मारपीट


पुलिस को सबसे पहले घटना की सूचना देने वाले नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस ने घायल रकबर के इलाज में न केवल ढाई से तीन घंटे की देरी की, बल्कि उसे रामगढ़ थाने ले जाकर उससे मारपीट भी की गई. वहीं उसकी मौत हुई.  गौरतलब है कि खुद पुलिस ने एफआईआर में शर्मा को घटना की सबसे पहले सूचना देने वाला और मौके पर साथ ले जाने वाला बताया है. शर्मा के इस सनसनीखेज खुलासे से पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है.  


उन्होंने बताया कि जब रात को घायल रकबर को थाने पर लेकर आए थे तब उनको गंभीर चोट नहीं थी और अगर चोट थी तो पुलिस ने अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं करवाया. पुलिस रकबर को 3 बजे अस्पताल लेकर गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.


नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि पुलिस को उन्होंने करीब 12.40 बजे सूचना दे दी थी. इसके करीब दस मिनट बाद ही वे खुद पुलिस थाने पहुंचे. जहां से पुलिस टीम उसे सरकारी वाहन में साथ लेकर घटनास्थल पर पहुंची. यहां रकबर कीचड़ में सना पड़ा था. उसे कोई ऐसी गंभीर चोट नहीं थी जिससे उसकी मौत हो जाती. इसलिए पुलिस मौके से उठाकर उसे सीधे रामगढ़ पुलिस थाने ले गई.  


यहां कीचड़ में सने रकबर को नहलाया गया और उसके कपड़े गीले हो जाने के कारण पुलिस ने ललावंडी निवासी धर्मेंद्र यादव को भेजकर कपड़े मंगाए और वे कपड़े उसे पहनाए गए. इस दौरान थाने में उसके साथ मारपीट की गई.  इसी मारपीट से रकबर की मौत हुई.


नवलकिशोर शर्मा का कहना है कि करीब दो से ढाई घंटे पुलिस ने रकबर को थाने में रखा. उसकी मौत पुलिस कस्टडी में मारपीट से हुई है. सूत्रों का कहना है कि रकबर की घटनास्थल पर हालात मरणांसन्न नहीं थी. ऐसा होता तो पुलिस उसे लेकर सीधे अस्पताल जाती. या तो उसकी हालत ठीक थी या पुलिस ने इलाज में देरी की. दोनों में कोई एक ही वजह हो सकती है.  


पुलिस की टाइमिंग पर सवाल


नवलकिशोर शर्मा के दावे के अलावा घटनाक्रम की टाइमलाइन भी पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रही है. दरअसल पुलिस ने एएसआई मोहन सिंह के हवाले से दर्ज एफआईआर में खुद कहा कि उसे रात करीब 12.40 बजे सूचना मिली. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस एक बजे भी घायल अकबर को लेकर चली तो महज 4 किमी दूर अस्पताल पहुंचने में 3 घंटे कैसे लग गए.  


अस्पताल में रकबर का इलाज करने वाले डॉक्टर के मुताबिक पुलिस उसे सुबह करीब 3 बजे अस्पताल लेकर पहुंची. यानी इलाज में करीब तीन घंटे की देरी हुई. रामगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर हसन अली ने कहा कि पुलिस 3 बजे अज्ञात व्यक्ति को लेकर आई थी जो मृत अवस्था मे था. उन्होंने कहा यह घटना एक बजे हुई है तो 3 बजे तक यह व्यक्ति कहां था. शायद समय पर अस्पताल में भर्ती कराया जाता तो शायद उसे बचाया जा सकता था.