पद्मभूषण और महाकवि गोपाल दास नीरज ने अपने निधन से एक सप्ताह पहले इच्छा मृत्यु की मांग की थी। यह जानकारी अलीगढ़ प्रशासन की ओर से दी गई है। अलीगढ़ जिला मजिस्ट्रेट को लिखे खत में कवि ने 11 जुलाई को इच्छा जाहिर की थी कि वह अपने शरीर से आत्मा को 'मुक्त' करना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि लगातार बीमारी की वजह से उनका शरीर बोझ बन गया है। अलीगढ़ जिला मजिस्ट्रेट चंद्र भूषण ने पुष्टि की है कि उन्हें कवि की ओर से 'इच्छा मृत्यु' का खत मिला था। 


जिला मजिस्ट्रेट ने बताया, '11 जुलाई को रजिस्टर डाक से खत भेजा गया था, जो हमें 16 जुलाई को मिला। इसी दिन नीरज को आगरा शिफ्ट किया गया था। उसके बाद चीफ मेडिकल ऑफिसर को तुरंत कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे।'


गोपाल दास नीरज की बेटी कुंदनिका शर्मा ने कहा, 'मुझे इसके बारे में दिल्ली में उनके इलाज के दौरान पता चला। उस दौरान पता चला कि उन्होंने अलीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट को खत लिखा है।'


हिन्दुस्तान टाइम्स के पास मौजूद खत की कॉपी से पता चला है कि वह पत्र 11 जुलाई को लिखा गया था। यह खत कवि के लेटर हेड पर अलीगढ़ जिला मजिस्ट्रेट को संबोधित करते हुए लिखा गया था।


खत में कवि नीरज ने लिखा था, 'मुझे पता है कि सुप्रीम कोर्ट ने हालही में ऐसे लोगों को इच्छा मृत्यु की मंजूरी दी है, जो शरीर के दर्द को सहन नहीं कर पा रहे हैं। मेरा शरीर और स्वास्थ्य अब किसी भी काम का नहीं है और मेरे लिए मेरा शरीर ही बोझ बन गया है। ऐसे में मैं अपने आपको इससे 'मुक्त' करना चाहता हूं।' 

बता दें, पद्मभूषण, महाकवि और गीतकार डॉ. गोपालदास नीरज शनिवार को अलीगढ़ में पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके लिखे कालजयी गीतों की धुनों के साथ शहर में अंतिम यात्रा निकाली गई। कृष्णांजलि नाट्यशाला में शहर के लोगों ने महाकवि को नम आंखों से विदाई दी। शाम को मोक्षधाम में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। नीरज के चार पुत्रों और पौत्र ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी। 


शनिवार को दोपहर एक बजे महाकवि का पार्थिव शरीर दिल्ली से आगरा होते हुए अलीगढ़ के जनकपुरी स्थित उनके आवास पर पहुंचा। सुबह से करीबियों का जमावड़ा अंतिम दर्शन को उमड़ पड़ा। यहां स्नान बाद कुछ देर के लिए पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। एडीएम सिटी व एसपी सिटी की मौजूदगी में पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया। इसके बाद नीरज के ही लिखे गीतों की धुन के बीच जनकपुरी ने भीगी पलकों से काव्य के सितारे को अंतिम विदाई दी।