राजसमंद: भले ही संविधान देश के नागरिक को कई मौलिक अधिकार देता हो, भले ही कानून व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करता हो, लेकिन आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके आगे संविधान और कानून बौने साबित हो जाते हैं. आज भी खाप पंचायतों के तुगलकी फरमान संवैधानिक अधिकारों पर एक गहरी चोट करते हैं. ऐसा ही एक मामला राजसमंद जिले के पिपलांत्री से महज 1 किमी दूर बसी एक ढाणी में नजर आया. कड़ेचो का गुड़ा ढाणी में 4 बेटियों और पत्नी के साथ रहने वाले गोपाल सिंह को भेरुजी की सराय गांव से तीन साल पहले निकाला दिया गया था.


पीड़ित परिवार का कहना है कि तीन साल से गांव के कुछ दबंग और पंच मिलकर उसका घर और जमीन हड़पने के चक्कर में हैं. इसलिए परिवार के साथ खूब ज्यादती की जाती है. तीन साल से इन लोगों का गांव से हुक्का पानी बंद है. गांव के पंचो का फरमान है कि गोपाल सिंह के परिवार के साथ गांव का कोई भी व्यक्ति बोलचाल या संबंध रखेगा तो उसको 11 हजार रुपये दण्ड के तौर पर देने पड़ेंगे.


इतना ही नहीं पीड़ित परिवार को शादी, विवाह या किसी भी तरह के समाजिक कार्यों में बुलाया तक नहीं जाता. न ही किसी भी मंदिर या देवी देवता के स्थान पर उनको जाने देते है. वाकई आज के वक्त में समाज का ये चेहरा भयानक ही लगता है. गांव के तमाम कामों को संपन्न कराने वाले तरुण सालवी का कहना है कि पीड़ित परिवार को गांव के किसी काम में बुलाने से पंचों ने मना किया है. 

ऐसे हालातों के चलते आज परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, परिवार की भूखे मरने तक की नौबत आ गई है. गोपाल सिंह की बेटी कृष्णा बताती है कि गांव की कोई लड़की उसके साथ कहीं नहीं जाती न कोई उससे बात करता है.


पीड़ित परिवार के हालातों का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है, तब तो बिल्कुल भी नहीं जब गोपाल को गांव में कोई मजदूरी के काम पर भी नहीं रखता. क्योंकि हर किसी को पंचों के फरमान का डर है, कि कहीं ऐसा न हो कि उन्हें 11 हजार रुपये का दण्ड भरना पड़े. आज परिवार अपने गांव में भी परायों की तरह रहने को मजबूर है.