जयपुर । राजस्थान की भावी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए इस बार अपनी टीम चुनना काफी चुनौती पूर्ण काम होगा। जनता से मिले भारी जनसमर्थन के कारण चुनाव जीते 162 भाजपा विधायकों में अधिकांश दिग्गज हैं। अब इनमें से जाति और क्षेत्र के आधार पर एक संतुलित मंत्रिमंडल का गठन मुश्किल काम माना जा रहा है। शुक्रवार को होने वाले मंत्रिमंडल गठन में वसुंधरा राजे नौ से बारह मंत्रियों को शपथ दिला सकती है। इसका अगला विस्तार लोकसभा चुनाव के बाद होने की संभावना है।

पिछले कार्यकाल में राजे ने पहले चरण में नौ मंत्रियों को शपथ दिलाई थी। इस बार विधायकों की संख्या ज्यादा होने के कारण इसमें दो-तीन की बढ़ोतरी हो सकती है। राजे के पास इस बार गुलाब चंद कटारिया, घनश्याम तिवाड़ी, कैलाश मेघवाल, नंदलाल मीणा, श्रीचंद कृपलानी, किरण माहेश्वरी, डॉ. रामप्रताप, डॉ. जसवंत यादव, नरपत सिंह राजवी, कालीचरण सराफ, राव राजेंद्र सिंह, अरूण चतुर्वेदी, सांवरलाल जाट, युनूस खान जैसे अनुभवी नेता है। इनके अलावा राजेंद्र राठौड़ का चुना जाना अभी बाकी है। राठौड़ चुरू से भाजपा प्रत्याशी है।

यहां बसपा प्रत्याशी की मौत के कारण चुनाव 13 दिसंबर को होगा। वह वसुंधरा के निकटस्थ माने जाते है। वसुंधरा की चुनौती यह है कि जाति और क्षेत्र में संतुलन कैसे बनाएं, क्योंकि इनमें जयपुर, उदयपुर, अजमेर जैसे संभागों से दो-तीन नाम तक है, जबकि पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान में बहुत कम नाम आते हैं। इसके अलावा जातिगत रूप से भी ब्राह्मंण, राजपूत नेताओं की संख्या ज्यादा है।

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