दिल्ली चुनावों में जीत का मीटर 28 सीटों तक पहुंचाकर अरविंद केजरीवाल ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि तीन राज्यों में भाजपा की जीत की चमक भी छीन ली। उन्हें पहले किंगमेकर बताया जा रहा था, अब किंग कहा जा रहा है। दरअसल, उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए उनकी कामयाबी का ग्राफ इतना ऊंचा पहुंच गया कि अचानक आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनावों की चर्चाओं में भी जगह पाने लगी।

अरविंद केजरीवाल और हाल में पैदा होने के बाद पुराने राजनीतिक दलों की नींद उड़ाने वाली उनकी पार्टी से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ कांग्रेस को। शीला दी‌क्षित की रहनुमाई में बीते 15 बरस से खड़ा कांग्रेस का किला जब गिरा, तो ऐसे गिरा कि सीएम समेत कैबिनेट मंत्री भी धूल में मिल गए।

कांग्रेस के अलावा भाजपा को भी काफी नुकसान हुआ, जो दोतरफा मुकाबले में जीत की उम्मीद बांध रही थी, लेकिन आप ने खेल बिगाड़ दिया। केजरीवाल सियासत में उतरे हैं, तो जाहिर है कि राजनीति के पुराने खिलाड़ी उनसे चिढ़ेंगे ही। लेकिन भाजपा-कांग्रेस के अलावा कुछ लोग ऐसे हैं, जो कभी अरविंद केजरीवाल के अपने होते थे। लेकिन आज 'आप' की जीत पर वे शायद दिल से खुश न हों।

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