झज्जर । अब लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को चुनाव के दौरान होने वाले खर्च के लिए अलग से बैंक या पोस्ट आफिस में खाता खोलना अनिवार्य होगा। इस आशय का एक पत्र गत 10 दिसंबर को निर्वाचन आयोग ने राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों को जारी किया है।

निवार्चन आयोग के पत्र में कहा गया है कि तमाम कोशिशों के बाद भी चुनाव के दौरान निर्धारित सीमा से ज्यादा धन खर्च करने पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। प्रत्याशी अलग-अलग खातों से पैसा खर्च करते हैं और जो ब्यौरा चुनाव आयोग के पास भेजते हैं वह आंख में धूल झोंकने वाला होता है। इस वजह से चुनाव खर्च की सीमा एक मजाक बनकर रह गई है। नए निर्देशों के मुताबिक लोकसभा व विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को अलग बैंक खाता खोलना होगा। चुनाव खर्च के लिए यह अकाउंट नामांकन दाखिल करने से एक दिन पहले तक हर हाल में खोलना अनिवार्य है। प्रत्याशी को नामांकन पत्र दाखिल करते समय इस खाते का पूरा विवरण रिटर्निग अधिकारी को देना होगा। उम्मीदवार यह खाता या तो अपने नाम पर या फिर अपने इलेक्शन एजेंट के साथ साझे तौर पर खोल सकेगा। यह खाता प्रत्याशी अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर तब तक साझा नहीं कर सकता है जब तक कि वह सदस्य प्रत्याशी का चुनाव एजेंट न हो।


चुनाव का नतीजा जारी होने के तीस दिन के भीतर चुनाव खर्च के ब्यौरे के साथ इस खाते का विवरण प्रत्याशी को जमा कराना होगा। खाते से बीस हजार रुपये तक की राशि का भुगतान क्रास चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से होगा। इससे ज्यादा की रकम खर्च होने पर खाते से कैश निकाला जा सकता है। उम्मीदवार को खाते में चुनाव खर्च की तय राशि एक बार में ही जमा करानी होगी। प्रत्याशी चुनाव के दौरान न तो स्वयं और न ही उसका चुनाव एजेंट चुनाव क्षेत्र में पचास हजार रुपये से ज्यादा रकम ले कर घूम सकेगा।

इस संबंध में निर्वाचन आयोग के सचिव एसके रूदोला का कहना है कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारी अपने इलाके के बैंकों तथा पोस्ट आफिसों में इस बात की सूचना भेज दें कि चुनाव खर्च का खाता पूरी तरह से अलग हो।

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