दिल्‍ली : सियासी हालात को देखते हुए ऐसा लगता है कि दिल्‍ली को नई सरकार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्‍ली में राष्‍ट्रपति शासन लगने के आसार बहुत ज्‍यादा बढ़ गए हैं.

उपराज्‍यपाल ऑफिस के सूत्रों ने मेल टुडे को जानकारी दी है कि एलजी नजीब जंग ने दिल्‍ली की राजनीतिक स्थिति पर अपनी रिपोर्ट राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेज दी है. इस रिपोर्ट में उपराज्‍यपाल ने कहा है कि दिल्‍ली में कोई भी पार्टी सरकार बनाने की‍ स्थिति में नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दिल्‍ली में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की गई है.

अगर हालात में बहुत ज्‍यादा उलटफेर न हुआ, तो दिल्‍ली में राष्‍ट्रपति शासन लग सकता है. ऐसी स्थिति में उपराज्‍यपाल नजीब जंग चार्ज ले सकते हैं. तब दिल्‍ली को नई सरकार के लिए अगले लोकसभा चुनाव तक इंतजार करना पड़ेगा, क्‍योंकि समझा जा रहा है कि दिल्‍ली के चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ ही कराए जाएंगे.

दरअसल, दिल्ली में सरकार बनने की कवायद तब दो कदम और पीछे चली गई, जब सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी ने एक और शर्त जोड़ दी. AAP ने सरकार बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस से हर मुद्दे पर लिखित समर्थन देने की बात कही. उसका कहना है कि दोनों पार्टियां 18 शर्तों को मानने का लिखित आश्वासन दें, तभी वह सरकार बनाने के बारे में सोचेगी

अरविंद केजरीवाल ने सरकार बनाने के लिए समर्थन दे रही कांग्रेस और बीजेपी के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर 18 शर्तें रखी हैं. केजरीवाल ने इसमें लिखा है कि वो सत्ता में आए, तो दिल्ली में कांग्रेस के पंद्रह साल में हुए घोटालों की जांच कराएंगे और एमसीडी में बीजेपी के शासन के दौरान हुए घोटालों की जांच करेंगे. बिजली कंपनियों के खातों की जांच की कराई जाएगी.

इससे पहले, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सरकार बनाने के लिए उपराज्यपाल नजीब जंग से दस दिन का वक्त मांगा. लेकिन उपराज्यपाल ने तब समय-सीमा तय नहीं की.

उपराज्यपाल ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी के पास बहुमत साबित करने लायक विधायक हो जाएं, तो वो आकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दें. राज्यपाल से मुलाकात के दौरान केजरीवाल ने कहा कि वो सरकार बनाने पर जनता की राय जानना चाहते हैं. इसके बाद जिस तरह कांग्रेस की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस हुई, उसके बाद सियासी घमासान और तेज हो गया. एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर चालू हो गया, जो अब तब जारी है.

बहरहाल, सियासत में सब कुछ मुमकिन है और कुछ भी नामुमकिन नहीं है. दिल्‍ली को नई सरकार के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी.


 

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