नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम आने के 10 दिन बाद भी न तो नई सरकार बन पाई है और न ही राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है। इस बीच ऐसे संकेत हैं कि सरकार बनाने के लिए जनता से संवाद शुरू कर चुकी आम आदमी पार्टी (आप) को कुछ और समय देकर राष्ट्रपति शासन को फिलहाल टाला जा सकता है। सियासी पंडितों का कहना है कि कांग्रेस 'आप' को दिल्ली में सरकार बनाने के लिए समर्थन दे चुकी है और पार्टी जनता में यही संदेश देना चाहती है कि आखिरकार उसी के समर्थन से सरकार बनी। ऐसे में यदि राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है तो 'आप' के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके समर्थकों को यह कहने का पूरा अधिकार होगा कि कांग्रेस एक ओर समर्थन देती है और दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति शासन लागू करा देती है।

शीला दीक्षित ही कार्यवाहक मुख्यमंत्रीकेंद्रीय मंत्रलय द्वारा 11 दिसंबर को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा शीला दीक्षित का इस्तीफा स्वीकार कर लिए जाने के बावजूद वह तब तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनी रहेंगी जब तक नए मुख्यमंत्री शपथ नहीं ले लेते अथवा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर ली जाती।

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव द्वारा निर्वाचित 70 विधायकों की सूची अधिसूचित किए जाने और यह सूची उपराज्यपाल नजीब जंग को सौंपे जाने के साथ ही पांचवीं विधानसभा का गठन हो गया था। चौथी विधानसभा का कार्यकाल 18 दिसंबर को खत्म होना था लेकिन पांचवीं विधानसभा का गठन पहले ही हो चुका है और चौथी विधानसभा भंग की जा चुकी है।

पूरी टीम करेगी जनमत संग्रहआम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नई सरकार के गठन के लिए चुनाव में विजयी तथा पराजित प्रत्याशियों की पूरी टीम को जनमत संग्रह के लिए उतार दिया है। पार्टी के 28 विधायक तथा चुनाव में हारे 41 प्रत्याशी यह काम करेंगे। कनॉट प्लेस स्थित पार्टी कार्यालय में बुधवार को सभी 41 प्रत्याशियों की बैठक बुलाकर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में केजरीवाल के कम से कम 30-30 हजार पत्रों को बांटने का काम दिया गया। गोपाल राय ने सभी प्रत्याशियों को आगामी रणनीति के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों में 25 लाख पत्रों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। पार्टी की रणनीति के मुताबिक कार्यकर्ता शनिवार व रविवार को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चारों वार्ड में जनसभा आयोजित कर केजरीवाल का पत्र पढ़ेंगे। इसके बाद सरकार बनाने या नहीं बनाने को लेकर हां या ना में जवाब पूछा जाएगा। पर्यवेक्षक इसकी रिपोर्ट तैयार कर पार्टी कार्यालय में जमा करेगा।

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