आइपीएल के यूएई चरण में पांच मैच गंवाने के बाद हमें पता था कि अब हमें एक बार में एक मैच के बारे में ही सोचना होगा और उसी के आधार पर रणनीति बनानी होगी। हमें हर मैच को फाइनल की तरह खेलने की जरूरत थी और टीम मीटिंग में भी हमने बाकी सब चीजों को भूल कर सिर्फ एक मैच पर ही फोकस करने पर जोर दिया। इसने गजब का काम किया और हम प्ले ऑफ में पहुंच गए।

जिस मैच की बदौलत हम नॉकआउट में पहुंचे हैं, उसमें हमने शानदार खेल दिखाया और मैच के बाद हमारी प्रतिक्रिया यह बताने के लिए काफी थी कि यह मैच हमारे लिए कितना अहम था। मैच खत्म होने के थोड़ी देर बाद तक तो खिलाड़ी इधर उधर भागते रहे और ड्रेसिंग रूम में भी यही माहौल बना रहा। इस तरह के परिणाम बहुत ही कम हासिल होते हैं।

यहां कोरी एंडरसन की तारीफ करनी होगी, वह एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग सब कुछ अच्छा कर सकते हैं। इसी वजह से हमने पहले 10 या 11 मैचों की तरह इस बार भी उनका पूरा समर्थन किया। टीम में संतुलन बनाने के लिए बीच में हमें उन्हें बाहर बैठाना पड़ा। यह एक ऐसा फैसला था, जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। 95 रनों की उनकी पारी ने उन्हें टूर्नामेंट के बाकी मैचों के लिए निश्चित तौर पर जरूरी आत्मविश्वास दिया होगा।

हमारी जीत के पीछे पूरी टीम का एकजुट प्रदर्शन है और यह एक या दो खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। मेरे लिए यह एक अच्छा संकेत है और इस वजह से हम चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ एलिमिनेटर गेम में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ उतरेंगे। हमें पता है कि चेन्नई को हराना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन साथ ही हमें यह भी पता है कि उन्हें हराने के लिए हमें क्या करना है। पिछले साल फाइनल में हम उन्हें हरा चुके हैं। हम जानते हैं कि चेन्नई को दबाव में खेलना पसंद नहीं है और हमारा लक्ष्य पर उन पर दबाव बनाना ही होगा। ब्रेबॉर्न स्टेडियम में मैं पहले भी खेल चुका हूं और जानता हूं कि यहां की पिच बल्लेबाजी के लिए अच्छी है। लेकिन पिच का मुयाअना करने के बाद ही हम यह फैसला करेंगे कि हमें एक अतिरिक्त स्पिनर को टीम में शामिल करना है या फिर तेज गेंदबाज को।

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