वसीम अकरम, रिवर्स स्विंग

हमारी टीम (केकेआर) को फाइनल में पहुंचाने का पूरा श्रेय कप्तान गौतम गंभीर को जाता है। जिस विश्वास और कौशल के साथ उन्होंने मैदान पर टीम की अगुवाई की, उससे हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भर गया। उन्होंने बल्ले से ज्यादा योगदान नहीं दिया, लेकिन मैदान पर उनकी मौजूदगी ने फर्क पैदा कर दिया। जिस तरह से उन्होंने अपने गेंदबाजों को बदल-बदल कर इस्तेमाल किया, वह काबिले तारीफ है। टूर्नामेंट में गंभीर इकलौते कप्तान रहे जो हर वक्त विकेट की तलाश में दिखे। विपक्षी टीम को दबाव में लाने और रनों के प्रवाह को रोकने का इससे बेहतर उपाय नहीं होता।

वह ऐसा करने में सफल रहे क्योंकि उनके पास तेज गेंदबाजी में मोर्ने मोर्केल और उमेश यादव की खतरनाक जोड़ी मौजूद थी। स्पिन विभाग में श्रेष्ठ सुनील नरेन थे। पीयूष चावला भी थे, जिन्होंने पिछले मैच में प्रभावशाली गेंदबाजी की और हमेशा कुछ देने को तैयार शाकिब अल हसन भी थे। उनकी कप्तानी की खास बात 14वें-15वें ओवर में अपने मुख्य गेंदबाज को आक्रमण में लगाना रहा। इन ओवरों में अन्य कप्तान आमतौर पर पार्ट टाइम गेंदबाज को ही गेंद थमाते हैं। वे मुख्य गेंदबाज को आखिरी ओवर के लिए बचा कर रखना चाहते हैं, लेकिन गंभीर कुछ अलग कर रहे हैं।

इन सबके बीच यदि गंभीर को इंग्लैंड दौरे के लिए टेस्ट टीम में शामिल किए जाने से मैं आश्चर्य में नहीं हूं। इंग्लैंड में गेंद बहुत स्विंग होती है ऐसे में गौती की विशेषज्ञता टीम के काम आएगी। लेकिन उमेश को शामिल नहीं किए जाने से मैं जरूर निराश हूं। वह लगातार 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंक रहा है। वह गति के साथ गेंद स्विंग कराता है, यॉर्कर भी उसका अहम हथियार है। वह अपने जीवन के सबसे बेहतरीन फॉर्म में है। न जाने क्यों उसके जैसे उभरते युवा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

फिलहाल हम अभी इन सब बातों को एक तरफ कर रविवार को होने वाले फाइनल पर ध्यान लगाए हुए हैं। हम एक बार फिर से विजेता ट्रॉफी चूमने को बेताब हैं। टीम आत्मविश्वास से लबालब है, लेकिन टी-20 प्रारूप में भविष्यवाणी करना बहुत ही मुश्किल होता है। जो भी हो हम अपना सर्वश्रेष्ठ देने को तैयार हैं।

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