Tuesday, October 4, 2022
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आईएनएस व‍िक्रांत के बाद नौसेना को म‍िले 2 डाइविंग सपोर्ट वेसल, एडम‍िरल कुमार बोले 2047 तक होंगे आत्‍मन‍िर्भर

विशाखापत्तनम । सन 2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह से आत्‍मन‍िर्भर हो जाएगी। उस समय तक जहाज, पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट, मानव रहित प्रणाली, हथियार और पूरा कॉम्पलेक्स सबकुछ स्वदेशी होगा। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि 2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगी। एडमिरल कुमार ने कहा क‍ि ‘जहाजों और पनडुब्बियों से लेकर कलपुर्जों और हथियारों के उत्पादन तक सभी जरूरत की चीजों का देश में ही उत्पादन होने लगेगा और भारतीय नौसेना पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो जाएगी।
नौसेना प्रमुख ने कहा इन बहुमुखी और आधुनिक जहाजों से न केवल हमारी खोज और बचाव क्षमताओं में बढोतरी होगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की विशिष्ट क्षमताएं बढ़ने से हमारी सैन्य ताकत में बढ़ोतरी होगी। भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा कि नौसेना, शिपयार्ड और उद्योग के बीच घनिष्ठ साझेदारी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की द‍िशा में एक प्रमुख डाइवर साब‍ित होगी। एचएसएल में नेवी वेलनेस और वेलफेयर एसोस‍िएशन (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए) की अध्‍यक्ष कला हरि कुमार (पत्‍नी एडम‍िरल आर हर‍ि कुमार) ने न‍िर्माणाधीन दो स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) निस्तार और निपुण को भी लॉन्‍च क‍िया। इन दोनों जहाजों का नाम भी रखा गया।
नौसेना, शिपयार्ड और उद्योग के बीच घनिष्ठ साझेदारी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की द‍िशा में एक प्रमुख डाइवर के रूप में साब‍ित होगी। नौसेना, शिपयार्ड और उद्योग के बीच घनिष्ठ साझेदारी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की द‍िशा में एक प्रमुख डाइवर के रूप में साब‍ित होगी। नौसेना प्रमुख ने कहा कि जहाजों की लॉन्चिंग भारतीय जहाज निर्माण उद्योग में आने वाले समय की विशेषज्ञता और अनुभव का प्रतिनिधित्व करती है। उन्‍होंने आईएनएस व‍िक्रांत का ज‍िक्र करते हुए कहा क‍ि हाल ही में कोच्‍चि में इस पहले स्वदेशी विमान वाहक को शाम‍िल क‍िया गया। एडमिरल हरि कुमार ने कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना के बढ़ते कद और बहुआयामी संचालन करने में सक्षम ‘बिल्डर्स नेवी’ के रूप में एक दुर्जेय समुद्री बल के रूप में अपने को पेश करते हैं।
उन्‍होंने यह भी क‍ि कहा कि एक बार चालू हो जाने के बाद, दो पोत, न केवल भारत के गहरे समुद्र में गोताखोरी के संचालन में एक नए युग की शुरुआत करेंगे, बल्कि एक विश्वसनीय बल के रूप में भारतीय नौसेना के कद को भी बढ़ाएंगे। हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में पनडुब्बी बचाव अभियान जैसे खास अभियान चलाने के लिए पहले रेस्‍पोंडर भी होंगे। उन्होंने यह भी कहा क‍ि भारतीय नौसेना को पूरी तरह से स्‍वदेशी बेस्‍ड बनाने के ल‍िए भारतीय शिपयार्ड में करीब 43 जहाज बनाए जा रहे हैं।

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