Sunday, September 25, 2022
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मप्र में 2014 से 2018 के बीच 209 तेंदुओं की मृत्यु

 भोपाल  । प्रदेश में 2014 से 2018 के बीच 209 तेंदुओं की मृत्यु हुई। इसमें 12 तेंदुओं की मृत्यु बाघों के साथ संघर्ष और 22 की बीमारी, डूबने, प्राकृतिक या अज्ञात कारणों से हुई। सात तेंदुओं की मृत्यु सड़क एवं रेल दुघर्टना के कारण हुई। इसमें सर्वाधिक चार प्रकरण औबेदुल्लागंज वनमंडल में सामने आए। यह बात भारत के नियंत्रक महानेखापरीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में कही, जिसे कल विधानसभा में पटल पर रखा गया। मध्य प्रदेश में वन्यप्राणी संरक्षण और वन्यप्राणी रहवासों के सतत प्रबंधन पर कैग ने रिपोर्ट तैयार की है। कैग ने इस बात पर भी आपत्ति उठाई कि माधव राष्ट्रीय उद्यान के दो प्रकरणों में दो तेंदुओं की मृत्यु की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को नहीं दी गई। फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही एक मामले में मृत्यु का कारण प्राकृतिक बताकर उसे समाप्त कर दिया। टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में 2014 से 2018 के बीच 115 बाघों की मृत्यु हुई। इसमें सर्वाधिक 40 बाघों की मृत्यु आपसी संघर्ष के कारण हुई। बिजली के करंट से 16 बाघ और 21 तेंदुओं की मृत्यु हुई। बाघ संरक्षण के लिए दिसंबर 2007 से न तो बांधवगढ़ और न ही पन्ना टाइगर रिजर्व में कोई योजना थी। कान्हा, पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में से किसी ने भी विशेष बाघ सुरक्षा बल की स्थापना नहीं की। कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि 2018 की बाघ गणना में बाघों की संख्या में 71 प्रतिशत की वृद्धि हुई और ये देश में सर्वाधिक 526 हो गए। दो बाघों को ओडिशा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व स्थानांतरित करने से पहले नए स्थल पर सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित नहीं किया गया। इसके कारण एक बाघ का नुकसान हुआ और दूसरा भी नए स्थल पर परिस्थितियों को अपना नहीं सका। हालांकि, संजय और पन्ना टाइगर रिजर्व के साथ नौरादेही अभयारण्य में बाघों का स्थानांतरण सफल रहा। 2014 से 2018 के बीच 115 बाघ और 209 तेंदुओं की मृत्यु हुई। 80 बाघों के मृत्यु प्रकरण प्रतिवेदित किए गए। कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मृत्यु दर सर्वाधिक रही। हालांकि, बाघों के संघर्ष को वन विभाग ने जुलाई 2021 में दिए उत्तर में बाघों की संख्या में 71 प्रतिशत की वृद्धि और बाघ पारिस्थितिकी में आपसी संघर्ष को सामान्य व्यवहार बताया है। रिपोर्ट में आपसी संघर्ष में बाघों की सर्वाधिक मृत्यु की बात सामने आई है। कान्हा टाइगर रिजर्व में सर्वाधिक 21, बांधवगढ़ में 12, पेंच में पांच, पन्ना टाइगर रिजर्व में एक बाघ की मृत्यु आपसी संघर्ष में हुई। बीमारी से बांधवगढ़ में 3, कान्हा और पेंच में एक-एक बाघ की मृत्यु हुई। जबकि, शिकार या जब्ती के 16 प्रकरण सामने आए। इसमें बांधवगढ़ में पांच, कान्हा में चार, पेंच में तीन और पन्ना टाइगर रिजर्व का एक मामला शामिल है। रिपोर्ट में अनुशंसा की गई है कि शिकार और मौतों की उच्च घटनाओं के लिए सुरक्षा उपाय अपनाने हाट स्पाट की पहचान करना चाहिए।बाघ संरक्षण योजनाओं और प्रबंध योजनाओं की प्रत्येक गतिविधि पर राशि के आवंटन और उपयोग की निगरानी के लिए तंत्र स्थापित किया जाए। विशेष बाघ संरक्षण बल की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाना चाहिए। पर्यटन से संबंधित गतिविधियां और बुनियादी ढांचे ऐसे हों, जिससे जंगली जानवरों और रहवासों की भलाई में बाधा न आए।

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