Sunday, September 25, 2022
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फिर चालू हो सकता है अफ्रीकन चीतों को बसाने का प्रोजेक्ट

भोपाल  । अफ्रीकन चीतों को प्रदेश के नौरादेही अभ्यारण में बसाने का प्रोजेक्ट एक बार पुन: प्रारंभ हो सकता है। इसकी संभावना और बढ गई है। पिछले बारह सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। पूर्व में हुए सर्वे में यहां के हालातों को अफ्रीकन चीतों के आवास के रुप में अनुकूल बताया गया था, लेकिन कूनो अभ्यारण ने बाजी मारते हुए यहां पहले चीतों को बसाने की तैयारी कर ली और शासन ने मंजूरी दे दी। पालपुर कूनो में बसाने की तैयारियों के बीच सागर-दमोह के नौरादेही वन्य प्राणी अभ्यारण के लिए अच्छी खबर सामने आई है। भविष्य में यहां भी अफ्रीकन चीतों को बसाने की योजना पर सरकार काम कर रही है।उल्लेखनीय है कि नौरादेही अभ्यारण में पिछले करीब 12 वर्ष से अफ्रीकन चीतों को बसाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन वन विभाग के सर्वे में कूनो वन्य प्राणी अभ्यारण ने बाजी मारते हुए वहां पहले चीतों को बसाने के लिए हरी झंडी दे दी। विगत दिवस प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह सहित वन विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में जानकारी भी सावर्जनिक की थी। अधिकारियों के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की टीम नौरादेही का पूर्व में दौरा भी कर चुकी हैं। नौरादेही अभ्यारण प्रबंधन के अनुसार दमोह, सागर और नरसिंहपुर तक 1112 कि लोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फै ले इस अभ्यारण में चीतों के लिए वह सब कु छ है जो उनके सरवाइव के लिए जरुरी है। घने जंगल, सैकड़ों हेक्टेयर में फै ले घास के मैदान, पहाड़ी इलाके ,भोजन आदि से यह अभ्यारण्य लवरेज है। वन्य प्राणी विशेषज्ञों की जानकारी के अनुसार चीते खेतों, ऊंचे घास के मैदान, मैदानों, हल्के पहाड़ी पथरीली इलाके में आसानी से सरवाइव करते हैं। नौरादेही अभ्यारण का रकबा करीब 1197 वर्ग कि लोमीटर है। बाघ प्रोजेक्ट के कारण इसे टाइगर रिजर्व के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उसमें 1230 कि लोमीटर से अधिक का इलाका चिन्हित कि या गया है। कू नो में 20 से 22 चीतों को छोड़ने की व्यवस्था और टेरिटरी की उपलब्धता बताई जा रही है,जबकि नौरादेही में उससे कई गुना अधिक छोड़े जा सकते हैं। केंद्र और राज्य सरकार विगत 12 वर्षों से नोरोदेही वन्य प्राणी अभ्यारण में अफ्रीकन चीतों को बसाने के लिए मैदानी सर्वे, प्रारंभिक तैयारियां कर रही है। पूर्व में नौरादेही अभ्यारण को चीतों को बसाने के लिए सुरक्षति स्थान माना गया था और इसके तहत मैदानी तैयारियों को प्रारंभ में भी कर दिया गया था।

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