कोहिमा. नगालैंड से आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) को वापस लेने के लिए जल्द ही एक कमेटी बनाई जाएगी. इसकी जानकारी नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने दी. उन्होंने रविवार दोपहर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद ट्वीट किया कि नागालैंड में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम को वापस लेने की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. इस महीने की शुरुआत में सेना के असफल अभियान और मोन जिले में हुई जवाबी हिंसा में 14 नागरिकों की मौत के बाद राज्य में विवादास्पद कानून को वापस लेने की मांग तेज हो गई थी.सीएम रियो ने ट्वीट किया, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में 23 दिसंबर, 2021 को हुई बैठक के संबंध में मीडिया को जानकारी दी. इस मामले को अत्यधिक गंभीरता से लेने के लिए अमित शाह जी का आभारी हूं. राज्य सरकार सभी से शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए अपील करती है.” इस बैठक में रियो के अलावा असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद थे.

नगालैंड विधानसभा में हाल ही में पास हुआ था अफस्पा को लेकर प्रस्ताव
बीते 20 दिसंबर को नगालैंड विधानसभा ने केन्द्र सरकार से पूर्वोत्तर, खास तौर से नगालैंड से अफस्पा हटाने की मांग को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था. दरअसल, सुरक्षा बलों द्वारा 14 असैन्य नागरिकों की हत्या के बाद सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा), 1958 और नगालैंड में उसके क्रियान्वयन पर बुलाए गए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री नेफियू रियो द्वारा इस विवादास्पद कानून को हटाने के लिए एक प्रस्ताव रखा गया था, जो ध्वनिमत से पारित हो गया.

सेना की गोलीबारी के बाद अफस्पा को हटाने की मांग तेज
गोलीबारी में मारे गए 14 असैन्य लोगों में से छह की हत्या आतंकवाद निरोधी अभियान के दौरान, जबकि आठ लोगों की मौत चार और पांच दिसंबर को मोन जिले में हुई घटनाओं में हुई. प्रस्ताव में “मोन जिले के ओटिंग-तिरु गांव में चार दिसंबर को हुई घटना और जिले में ही पांच दिसंबर को हुई घटना में लोगों की मौत की कटु आलोचना की गई थी.चार दिसंबर को भारतीय सेना के 21पारा स्पेशल फोर्स ने अंधाधुंध गोलियां चलायी थीं, जिसमें 13 लोग मारे गए थे. उसके बाद पांच दिसंबर को सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि 35 लोग घायल हो गए थे.”