आयुष्मान कार्ड के इंतजार में सात वर्षीय फरहाना की मौत हो गई। मामला पूर्वी टुंडी प्रखंड के चुरुरिया पंचायत के घुरनीबेड़ा गांव के फारूक अंसारी की पुत्री का है। बेटी फरहाना खातून का समय पर इलाज नहीं हो सका।

फारूक अंसारी का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही की वजह से बेटी का इलाज नहीं हो सका। राशन कार्ड में बेटी का नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन के बाद ओटीपी भी आया था। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने समय पर कार्रवाई नहीं की इस कारण बेटी का नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ा और आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन सका। इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।

कार्यालय से जनता दरबार तक लगाया चक्कर
पेशे से ड्राइवर फारूक अंसारी ने बताया कि रांची में इलाज के दौरान पता चला था कि बेटी को ब्रेन कैंसर है।  इलाज में काफी खर्च आने की बात भी डॉक्टरों ने बताई थी। इसके लिए  आयुष्मान योजना से  कार्ड बनाकर टाटा हॉस्पिटल में इलाज करने की सलाह दी गई थी। जब कार्ड बनाने गए तो पहले राशन कार्ड में बच्ची का नाम शामिल करने को कहा गया। उसके बाद  एक नवंबर 2019 को प्रखंड आपूर्ति कार्यलय में ऑन लाइन आवेदन दिया। इसके बाद एमओ के मोबाइल पर ओटीपी आया, जिसे उन्हें डीएसओ को फॉरवर्ड करना था परंतु उस ओटीपी को फारवर्ड नहीं किया गया।

फारूक अंसारी ने बताया कि कई बार सरकारी पदाधिकारियो के कार्यालय में चक्कर काटते रहे परंतु कोई नतीजा नहीं निकला। अंत मे पूर्वी टुंडी के जनता दरबार मे भी फरियाद लेकर गया वहां भी मुझे आश्वासन मिला कि दो- चार दिन में नाम चढ़ जायेगा, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। सरकार की अति महत्वपूर्ण आयुष्मान योजना के लाभ से वंचित रह गया। दिन ब दिन मेरी बेटी की स्थिति बिगड़ती गई और सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। फारूक ने बताया कि बेटी के इलाज करवाने में काफी खर्च हुआ और कई लोगों से कर्ज भी लिया लेकिन बदनसीब था कि बेटी को नहीं बचा पाया।

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी निर्मल कुमार सिंह ने बताया कि उस समय मैं छुट्टी में दिल्ली गया था। मैंने किसी को प्रभार भी नहीं सौंपा था। मेरी मानवीय भूल थी कि मैं ओटीपी डीएसओ को फॉरवर्ड नहीं कर पाया।