प्रयागराज. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर हुई हिंसा पर मुंबई के अधिवक्ता अजय कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र भेजा है. ईमेल के जरिए भेजे गए इस पत्र को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए संज्ञान लिया है. इस पत्र में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को दबाने के लिए पुलिस की कार्रवाई का जिक्र है. जिस पर अब कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता एके गोयल ने नोटिस स्वीकार किया. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.

हाईकोर्ट ने किया न्यायमित्र नियुक्त

हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता फरमान नकवी और अधिवक्ता रमेश कुमार यादव को न्याय मित्र भी नियुक्त किया है. अपने ईमेल में मुंबई के अधिवक्ता अजय कुमार ने न्यूयॉर्क टाइम्स और द टेलीग्राफ में प्रकाशित दो लेखों की प्रतियां भेजी हैं, जिसमें उन्होंने विस्तार से उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए पुलिस बर्बरता का जिक्र किया है. इन लेखों में यह भी कहा गया कि इन घटनाओं से प्रदेश व देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हो रही है.


16 जनवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई

कोर्ट के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता फरमान नक़वी ने आज के इंडियन एक्सप्रेस की खबर की प्रति रखी. जिसमें मुजफ्फरनगर के मदरसे में बच्चों की निर्मम पिटाई और उनसे जबर्दस्ती जय श्री राम का नारा लगवाने का हवाला दिया गया है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को आदेशित किया है सारे कागजात न्यायमित्र फरमान नक़वी और रमेश कुमार यादव को उपलब्ध कराया जाए, ताकि इस मामले में वकील की भूमिका निभा सकें. इस मामले में 16 जनवरी को मामले की होगी सुनवाई.