कोरबा।गांव और छोटे कस्बों के बच्चों के लिए डाक्टर-इंजीनियर बनने के लिए तैयारी करना एक सपने जैसे लगता है। डाक्टर-इंजीनियर बनने की तैयारी के लिए बड़े शहरों और महंगे कोचिंग संस्थानों में रहकर तैयारी करना पड़ता है। महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरना गरीब परिस्थिति वाले बच्चों के लिए नामुमकिन सा लगता है। कोरबा जिला प्रशासन गरीब, मेधावी बच्चों के डाक्टर-इंजीनियर बनने के सपने को साकार कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित अग्रगमन कोचिंग योजना में इस वर्ष नीट परीक्षा की तैयारी करने वाली बैच में कुमारी रंजीता बिंझवार ने पहला स्थान हासिल किया है। देश की सर्वोच्च मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को रंजीता ने 385 अंकों के साथ क्वालीफाई किया है। रंजीता डाॅक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती है। नीट क्वालीफाई होने के बाद रंजीता ने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन की अग्रगमन कोचिंग को दिया है। उन्होंने कहा कि अग्रगमन में रहकर पढ़ाई करने से ही मुझे कामयाबी मिल पाई। रंजीता ने बताया कि गांव के बच्चों के लिए उच्च स्तर के परीक्षा की तैयारी करना चुनौती भरा और कठिन रहता है। अग्रगमन के शिक्षकों द्वारा दी गई सही शिक्षा और लगातार पढ़ाई की बदौलत नीट परीक्षा क्वालीफाई होने में सफलता मिली। रंजीता ने बताया कि अग्रगमन में मुफ्त में रहने, खाने-पीने के साथ पढ़ाई का अच्छा माहौल भी प्रदान किया जाता हे। रंजीता ने अग्रगमन के शिक्षकों द्वारा लगातार विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए प्रोत्साहित करने का भी नीट परीक्षा में कामयाबी का कारण बताया।
    विकासखंड कटघोरा के ग्राम मनगांव निवासी नीट परीक्षा में अग्रगमन से 28 क्वालीफाईड बच्चों में पहला स्थान प्राप्त करने वाली रंजीता बिंझवार ने बताया कि उनकी तीन बहन और दो भाई हैं। रंजीता के पिताजी एसईसीएल छुराकछार में कार्यरत हैं तथा उनकी मां गृहणी है। स्कूली कक्षाओं में अव्वल रहने वाली रंजीता ने कक्षा दसवीं में 88 प्रतिशत और कक्षा 12 वीं में 81 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। कक्षा दसवी पास करने के बाद रंजीता को जिला प्रशासन के अग्रगमन कोचिंग योजना के बारे में शिक्षकों से जानकारी प्राप्त हुई। रंजीता बताती है कि अग्रगमन में चयन होने से बड़े कोचिंग संस्थानों के महंगे फीस और रहने खाने की चिंता दूर हो गई। रंजीता ने बताया कि अग्रगमन में पढ़ाई का अच्छा माहौल और शिक्षकों द्वारा लगातार प्रोत्साहित करने के साथ खुद 10-11 घंटों की पढ़ाई के बदौलत नीट परीक्षा में कामयाबी मिल पाई।
    डाक्टर-इंजीनियर बनने के सपने के बीच गरीबी, आर्थिक स्थिति, पढ़ाई के संसाधन तथा पढ़ाई का उच्चतम माहौल आड़े आती है। अग्रगमन जिले के बच्चों के लिए मेडिकल-इंजीनियर की तैयारी के लिए बहुत ही अच्छा जरिया है। कोरबा जिला प्रशासन ऐसे गरीब, मेधावी बच्चों को इंजीनियर-डाक्टर बनाने के लिए सफलता की राह दिखा रहा है। अग्रगमन में दसवीं पास मेधावी विद्यार्थियों को रखकर मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा रही है। अग्रगमन में मुफ्त में रहने, खाने-पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। अग्रगमन में विषयवार शिक्षकों द्वारा प्रवेश परीक्षा की पूरी तैयारी करवाई जाती है। इस वर्ष नीट परीक्षा में अग्रगमन के 28 क्वालीफाइड बच्चों में पहला स्थान प्राप्त करने वाली रंजीता जिला प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली पढ़ाई की सुविधा से बेहद खुश है। उन्होंने नीट परीक्षा पास करने में अग्रगमन के शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान बताया। रंजीता कहती है कि अग्रगमन के शिक्षकों द्वारा विशेष रूप से तैयारी करवाने, लगाता लिये गये टेस्ट, नीट परीक्षा के लिए प्रश्न हल करने के तरीके, समय प्रबंधन के बताये गुर के कारण ही नीट जैसे अखिल भारतीय स्तर के परीक्षा को पास करने में सफलता हासिल कर पाई।