अलवर. कोटा के बाद अलवर (alwar) में शिशु अस्पताल में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है. राजकीय गीतानंद शिशु हॉस्पिटल (Geetanand Children Hospital) के एफबीएनसी वार्ड में लापरवाही से मशीन (baby Incubator) या बेबी-वार्मर (baby warmer) में 15 दिन की नवजात गम्भीर रूप से झुलस गई और स्टाफ को भनक तक नहीं लगी. वार्ड में धुंआ ही धुंआ दिखाई देने के बाद सुबह 5 बजे के करीब अन्य बच्चों के परिजनों ने वार्ड के स्टाफ को सूचित किया. इसके बाद वार्ड में मौजूद अन्य 15 नवजात बच्चों को वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया. इतनी बड़ी घटना के बाद भी अस्पताल प्रसासन मामले को दबाने में जुटा रहा. बच्ची की जान पर बन आई तो अस्पताल प्रसासन ने बच्ची को अलवर से जयपुर के जेके लोन अस्पताल में रैफर कर दिया.

रात 10 बजे अस्पताल में छोड़ गए थे परिजन

बच्ची के परिजनों का कहना है कि 15 दिन बच्ची की को सांस की समस्या होने पर भर्ती कराया था और मंगलवार को उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट करना था. रात 10 बजे स्वस्थ अवस्था मे परिजन नवजात को मशीन में देखकर गए थे, तब बच्ची ठीक थी. सुबह 5 बजे अस्पताल के स्टाफ ने फोन कर उन्हें इमरजेंसी में बुलाया. उनका कहना है कि 'वे लोग जब वहां पहुंचे तो बच्ची पूरी तरह से जली हुई है'.


परिजनाें के गंभीर आरोप, वार्ड में सो जाता है स्टाफ

बच्ची के पिता राहुल गौड़ के अनुसार वार्ड में स्टाफ की ओर से परिजनों को प्रवेश नहीं दिया जाता. और खुद स्टाफ लापरवाही करता है. और बच्चों की देखभाल नहीं होती. परिजनो ने स्टाफ पर रात में वार्ड में सो जाने का आरोप भी लगाया है.

एडीएम उत्तम सिंह शेखावत और पीएमओ सुनील चौहान सहित अन्य अधिकारी इस घटना की सूचना के बाद अस्पताल पहुंचे. परिजनों और अन्य मौजूद लोगों का कहना है कि अस्पताल में स्टाफ और डॉक्टरों की मनमर्जी और दबंगई चलती है पिछले कई सालों से एक ही स्टाफ यहां जमा हुआ है और आए दिन अस्पताल में इस तरीके की मौत होती रहती हैं.
वहीं, इस मामले पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर शहर उत्तम सिंह शेखावत का कहना है कि बच्ची को वार्ड में भर्ती कराया था. मशीन में बच्चे झुलस गई है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑक्सीजन की नली में लीकेज होने की वजह से यह घटना हुई है अन्य बच्चों को भी दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया है मामले की जांच की जा रही है.