बारिश का मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है। कुछ बीमारियां तो ऐसी हैं जिसे लेकर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती गई तो वो खतरनाक भी हो सकता है। इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी चिकनगुनिया है। चिकनगुनिया बारिश के मौसम में फैलने वाली बीमारी है। इस मौसम में इस बीमारी के फैलने का अनुकूल वातावरण रहता है। ये बीमारी मच्छर के काटने से होती है। जानिए चिकनगुनिया बीमारी के कारण, लक्षण और इससे बचाव का तरीका।

कैसे होता है चिकनगुनिया 

चिकनगुनिया बीमारी मच्छर के काटने से होती है। ये बीमारी जिस मच्छर की वजह से फैलती है उस मच्छर का नाम है मादा एडिस एजिप्टी और एडीस एल्बोपिक्टस। खास बात है कि चिकनगुनिया और डेंगू दोनों बीमारी इसी मच्छर के काटने से फैलती है। इन मच्छरों की खासियत है कि ये ज्यादा ऊंचे नहीं उड़ पाते और दिन में ही काटते हैं। 

चिकनगुनिया के लक्षण
डेंगू की तरह चिकनगुनिया के लक्षण 3 से 4 दिन बाद ही दिखने लगते हैं। कई बार बीमारी के पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है। जानिए चिकनगुनिया के लक्षण के बारे में...


चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण में तेज बुखार होना है। बुखार का तापमान 102 से कई बार 104 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। बुखार की तेजी इतनी होती है कि आंखें खुलना भी मुश्किल हो जाता है।

जोड़ो में दर्द होना और सूजन आना
तेज बुखार के साथ जोड़ो में दर्द होना और सूजन आना भी चिकनगुनिया बीमारी का संकेत है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के घुटनों में इतना जबरदस्त दर्द होता है कि उसका चलना फिरना तो दूर बेड से उठना भी मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही जोड़ों में सूजन भी आ जाती है।  

मांसपेशियों में दर्द होना
इन लक्षणों के साथ-साथ अगर मांसपेशियों में लगातार दर्द हो, तो ये भी चिकनगुनिया बीमारी का संकेत है। 

स्किन पर रैशेज होना
इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर पर गुलाबी रंग के रैशेज पड़ने लगते हैं। ये रैशेज गर्दन, चेहरे और छाती में भी हो सकते हैं। 

कमजोरी होना
इन सब लक्षणों के अलावा अगर आपको थोड़ा सा भी काम करने के बाद थकान या फिर उल्टी के साथ-साथ कमजोरी भी महसूस हो तो ये भी चिकनगुनिया का संकेत है। 

चिकनगुनिया से बचने का उपाय

  • इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है अपने आसपास जलभराव न होने देना
  • अगर आसपास पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी भर दें। अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो उसमें मिट्टी के तेल भी बूंदे डाल दें
  • खुले पानी को न पिएं
  • रात को सोते वक्त मच्छरदानी का इस्तेमाल करें या फिर मॉस्किटो रिफिल लगाएं
  • फुल आस्तीन के कपड़े पहनें