हिसार।  जलवायु परिवर्तन ने ऋतुओं के आने और जाने के समय को पूरी तरह से बदल दिया है। सिर्फ ऋतु ही नहीं बल्कि मानसून में भी परिवर्तन दिख रहा है। इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून (वर्षा ऋतु का समय) समय से 15 दिन पहले आया, इसके साथ ही पूरे सीजन में अत्यधिक वर्षा करते हुए 16 दिन देरी से गया। इस परिवर्तन के कारण जलजमाव जैसी स्थिति तैयार हुई और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इसके साथ ही अक्टूबर शुरू होते ही ठंड का हल्का अहसास होना शुरू हो जाता है। मगर 15 दिन बाद अब ठंड महसूस हो रही है। मौसम का चक्र समय से चलने का कारण विज्ञानी जलवायु परिवर्तन मान रहे हैं। यह जलवायु परिवर्तन वायु प्रदूषण के बढ़ने के कारण हो रहा है। पिछले दो वर्षों में वायु प्रदूषण की स्थिति कुछ ठीक थी मगर अब फिर से काला धुंआ अपने पांव पसार रहा है। इस समय हिसार में रात्रि तापमान सामान्य से तीन डिग्री घटकर 16.3 डिग्री सेल्सियस पर बना हुआ है। सुबह और सायं दोनों समय तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है।

वायु प्रदूषण का जलवायु परिवर्तन में रोल

 पूरी दुनिया में सिर्फ 10 फीसद लोग वैश्विक तापमान से जुड़ी ग्रीन हाउस गैसों के अधिकतर उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन उसका नुकसान पूरी दुनिया, खासतौर से गरीब देशों गरीब लोगों को उठाना पड़ रहा है। वैश्विक तापमान जलवायु परिवर्तन के कारण दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या और तीव्रता में बढ़ोतरी हो रही है।

उदाहरण के तौर पर वर्ष 2017 में उत्तर पूर्वी भारत, बांग्लादेश एवं नेपाल में बाढ़ की वजह से 1,000 से अधिक लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और करीब 4 करोड़ लोगों को अस्थायी विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। इसी तरह 2020 के मानसून के दौरान भी इन्ही इलाकों में भीषण बाढ़ के कारण 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और करीब 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को हफ्तों तक अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा।

जलवायु परिवर्तन से क्या तात्पर्य है 

जलवायु का आशय किसी क्षेत्र में लंबे समय तक औसत मौसम से होता है। जब किसी क्षेत्र विशेष के औसत मौसम में परिवर्तन आता है तो उसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि से लेकर लोगों के जीवन तक को प्रभावित करता है। बारिश के पैटर्न में बदलाव, शहरीकरण, अधिक तापमान आदि जलवायु परिवर्तन को प्रदर्शित करते हैं।